
बृजेश आनन्द राय
जौनपुर (उत्तर प्रदेश)
********************
तुम भी क्या याद रखोगी गोरी!
खेली थी कभी होरी ।
खेली खूब है होरी सखी री!
खेली खूब है होरी।।
बजने लगा जब मृदंग मजीर,
तुम घर में छुपी थी गोरी!
पर मनवा न माने,
प्रेम डोर खिचे ताने,
आयी विवश हुई तू चकोरी!
प्रिय से नजर मिलाते छुपाते
भागी थी गलियों में गोरी!
अंग अंग प्रस्वेद-प्रकम्पन,
लज्जा ने मारी पिचकारी
बन्द आंँख जब खोली तो देखी,
थी भीगी चुनरिया सारी…
खिसक गई तेरी सर से चुनरिया,
भीग गयी तेरी चोली।
खेली खूब है होरी सखी री,
खेली खूब है होरी।।
अंग-अंग में मस्ती छायी,
नशा था चितवन का
आंँखों से मारी पिचकारी,
रंग था यौवन का
भीगी पिया संग गोरी,
मले गालों से गालों पे रोरी
मन में प्रेम रस फूटा,
मुस्कुराई, दिया गारी
कैसे नखरे दिखाए,
कैसे करे सीनाजोरी
बोलो हे गोरी! बोलो हे गोरी!
बोलो हे गोरी!
खेली खूब है होरी सखी री!
खेली खूब है होरी।
न बैठन देती है बहार,
पड़े जब रंगो की फुहार
चलती आंँखों से कटार,
होती दिल के आर-पार
जिनके दिल में ना हो प्यार,
वो भी करते हैं मनुहार
चिर वियोगी-मन,
कर लेता है श्रृंगार
इक तरफ इतराती,
दूजे करे है ठिठोली
पिया जाने तेरा मन,
क्यूँ बनती है भोली
बोलो हे गोरी! बोलो हे गोरी!
बोलो हे गोरी!
खेली खूब है होरी सखी री!
खेली खूब है होरी।
तुम भी क्या याद रखोगी गोरी!
खेली थी कभी होरी।।
खेली खूब है होरी सखी री,
खेली खूब है होरी।।
परिचय :- बृजेश आनन्द राय
निवासी : जौनपुर (उत्तर प्रदेश)
सम्मान : राष्ट्रीय हिंदी रक्षक मंच इंदौर म.प्र.द्वारा शिक्षा शिरोमणि सम्मान २०२३ से सम्मानित
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।
आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपने परिचय एवं छायाचित्र के साथ प्रकाशित करवा सकते हैं, राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि प्रकाशित करवाने हेतु अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, हिंदी में टाईप करके हमें hindirakshak17@gmail.com पर अणु डाक (मेल) कीजिये, अणु डाक करने के बाद हमे हमारे नंबर ९८२७३ ६०३६० पर सूचित अवश्य करें …🙏🏻
आपको यह रचना अच्छी लगे तो साझा अवश्य कीजिये और पढते रहे hindirakshak.com राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच से जुड़ने व कविताएं, कहानियां, लेख, आदि अपने चलभाष पर प्राप्त करने हेतु राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच की इस लिंक को खोलें और लाइक करें 👉 hindi rakshak manch 👈… राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच का सदस्य बनने हेतु अपने चलभाष पर पहले हमारा चलभाष क्रमांक ९८२७३ ६०३६० सुरक्षित कर लें फिर उस पर अपना नाम और कृपया मुझे जोड़ें लिखकर हमें भेजें….🙏🏻










