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मातरम्

सूर्यपाल नामदेव “चंचल”
जयपुर (राजस्थान)
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शिवालयों से शंखनाद हुआ है गुरुवाणी गुरुद्वारे से।
कानों ने अजान सुनी फिर गूंज उठा हर चौबारे से।।
मातरम्, मातरम्, वंदे मातरम्, वंदे मातरम्।।

तोड़ पुरानी जंजीरों को आज नया इतिहास लिखें,
गर्म लहू की धाराओं से राष्ट्रभूमि का श्रृंगार करें।
मिट्टी से उपजे मिट्टी को ही बलिहार करें,
देश की खातिर मिट जाने का कर ले तू आचरण।।
मातरम् मातरम् वंदे मातरम् वंदे मातरम्।।

ये मिट्टी है बलिदान की किसान और जवान की,
तन को आज रंगा कर इसमें सर ऊंचा अभिमान करें।
मिट्टी के कण कण से उठते देशप्रेम का गुणगान करें,
बच्चा बच्चा देशभक्ति का ओढ़े अब आवरण।।
मातरम् मातरम् वंदे मातरम् वंदे मातरम्।।

मिट्टी में ममता मां की इंसान खेलता गोद में इसकी,
मल मल के रज कण जिस्म से मिल शत्रु से संग्राम करें।
मैं सपूत मैं रखवाला झुका शीश मिट्टी को प्रणाम करें,
सुदृढ़ सशक्त छबि हो ऐसी कर न सके कोई आक्रमण।।
मातरम् मातरम् वंदे मातरम् वंदे मातरम्।।

परिचय :- सूर्यपाल नामदेव “चंचल”
शिक्षा : एम ए अर्थशास्त्र , एम बी ए ( रिटेल मैनेजमेंट)
व्यवसाय : उद्यमी, प्रबंधन सलाहकार, कवि, लेखक, वक्ता
निवासी : जयपुर (राजस्थान)
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरा यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है।

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