
मीना भट्ट “सिद्धार्थ”
जबलपुर (मध्य प्रदेश)
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शिक्षा से कल्याण है,
सहज बढ़ाती ज्ञान।
शिक्षा तो वरदान है,
देती है सम्मान।।
देती है सम्मान,
करे जीवन उजियारा।
करती है उद्धार,
भगाती है अँधियारा।।
अज्ञानी नादान,
पढ़ो लो गुरु से दीक्षा।
करे सदा उपकार,
निखारे जीवन शिक्षा।।
ज्ञानी शिष्ट सुशील हो,
सतत् पढ़ो विज्ञान।
जीवन होगा फिर सफल,
अध्ययन हो सुजान।।
अध्ययन हो सुजान,
बने ज्ञानी हर पीढ़ी।
वृद्धि होगी विवेक,
चढ़ोगे नित नव सीढ़ी।।
होंगे फिर विद्वान,
अगर महिमा पहचानी।
करो नित्य अभ्यास,
मिलेगी विद्या ज्ञानी।।
करती पूजन शारदे,
दो शिक्षा वरदान।
माता विद्या दो हमें,
ले लो अब संज्ञान।।
ले लो अब संज्ञान,
पढें हम जाकर शाला।
नित्य बढ़ेगा ज्ञान,
मिले साहस मतवाला।।
विद्या है रस खान,
कष्ट सारे ही हरती।
शिक्षा दे पहचान,
स्वप्न सब पूरे करती।।
परिचय :- मीना भट्ट “सिद्धार्थ”
निवासी : जबलपुर (मध्य प्रदेश)
पति : पुरुषोत्तम भट्ट
माता : स्व. सुमित्रा पाठक
पिता : स्व. हरि मोहन पाठक
पुत्र : सौरभ भट्ट
पुत्र वधू : डॉ. प्रीति भट्ट
पौत्री : निहिरा, नैनिका
सम्प्रति : सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश (मध्य प्रदेश), लोकायुक्त संभागीय सतर्कता समिति जबलपुर की भूतपूर्व चेयरपर्सन।
प्रकाशित पुस्तक : पंचतंत्र में नारी, काव्यमेध, आहुति, सवैया संग्रह, पंख पसारे पंछी
सम्मान : विक्रमशिला हिंदी विश्वविद्यालय द्वारा, विद्या सागर और साहित्य संगम संस्थान दिल्ली द्वारा, विद्या वाचस्पति की मानद उपाधि, गुंजन कला सदन द्वारा, महिला रत्न अलंकरण, राष्ट्रीय हिंदी रक्षक मंच इंदौर द्वारा “उत्कृष्ट न्यायसेवा अंतर्राष्ट्रीय सम्मान २०२४” से सम्मानित तथा कई अन्य साहित्यिक संस्थाओं से सम्मानित
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