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भोर सुहानी

मीना भट्ट “सिद्धार्थ”
जबलपुर (मध्य प्रदेश)
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भोर सुहानी आ गयी, पंछी करते शोर।
कैसी अनुपम छवि प्रकृति, मनवा भाव विभोर।।

बूँद ओस की गिर रही, शीतल बहे समीर।
भोर सदा देखो हरे, अँधियारे की पीर।।

आभा लाया है नई, सुंदर नवल प्रभात।
सुखदायक यह भोर है, बीती काली रात।।

जीवन सारा खिल उठा, महक रहा हर अंग।
कान्हा की बंशी बजे, नाचें राधा संग।।

जपो नाम भगवान का, बेडा होगा पार।
पूरे होंगे स्वप्न सब, खुशियाँ मिले अपार।।

स्वागत करिए भोर का, लेकर नव विश्वास।
चमकी किरणें हैं धरा, कर लो योगाभ्यास।।

वंदन करिये भोर का, ईश नवाओ शीश।
मात-पिता चरनन रहो, नाम जपो जगदीश।।

ताल देख पंकज खिले, फूल महकते बाग।
भोर सुनाता आज है, नव जीवन का राग।।

मानव करता कर्म है, भोर मचाता शोर।
निकले तम को चीरती, किरणें ये चहुँओर।।

जागा नव उल्लास है, आया नया उमंग।
गोरी नाचे है मचल, थिरक रहा हर अंग।।

परिचय :- मीना भट्ट “सिद्धार्थ”
निवासी : जबलपुर (मध्य प्रदेश)
पति : पुरुषोत्तम भट्ट
माता : स्व. सुमित्रा पाठक
पिता : स्व. हरि मोहन पाठक
पुत्र : सौरभ भट्ट
पुत्र वधू : डॉ. प्रीति भट्ट
पौत्री : निहिरा, नैनिका
सम्प्रति : सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश (मध्य प्रदेश), लोकायुक्त संभागीय सतर्कता समिति जबलपुर की भूतपूर्व चेयरपर्सन।
प्रकाशित पुस्तक : पंचतंत्र में नारी, काव्यमेध, आहुति, सवैया संग्रह, पंख पसारे पंछी
सम्मान : विक्रमशिला हिंदी विश्वविद्यालय द्वारा, विद्या सागर और साहित्य संगम संस्थान दिल्ली द्वारा, विद्या वाचस्पति की मानद उपाधि, गुंजन कला सदन द्वारा, महिला रत्न अलंकरण, राष्ट्रीय हिंदी रक्षक मंच इंदौर द्वारा “उत्कृष्ट न्यायसेवा अंतर्राष्ट्रीय सम्मान २०२४” से सम्मानित तथा कई अन्य साहित्यिक संस्थाओं से सम्मानित
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।

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