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९० के दशक का प्रेम

शिवदत्त डोंगरे
पुनासा जिला खंडवा (मध्य प्रदेश)
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९० का प्रेम भी
अजीब था
किसी को देखने
के लिए
जाने कितने
प्रेमियों की
साइकिल की चेन
हमेशा ही
उतरा करती थी.

कितनी खिड़कियों
को आँखें मिलती थी
किस टाइम पर उन्हें
खुलने का अधिकार
मिला था
सिर्फ वही
समझती थी.

रंगबिरंगे कागज़ पर
कितने जवां दिलों
ने कांपते हाथों से
प्रेम की
दास्तान लिखी.

कितने प्रेमियों ने
नोटबुक के आखरी
पृष्ठ पर अनजान सी
आँखें
बनायी होगी
तो किसी ने मेहंदी
की डिजाइन पर
अपने महबूब का नाम
छुपा कर लिखा होगा.

अगर प्रेम गीत
नहीं लिखे गए तो
मोहब्बत
अंदर ही अंदर
घुटती रहती
फिर एक दिन टेंट
हाउस का सामान
डाले टेंपो आता
तो पता चलता
अपना चांद किसी
दूसरी की छत की
चांदनी बन चुका.

कितनी अच्छी
मोहब्बत थी बिल्कुल
“उसने कहा था”
ये कहानी
हर किसी ने
पढ़ी थी
कितने ही
चंदर और सुधा
मोहब्बत का गुनाह
कर बैठे.

आज भी एकटक
आसमां से
देखा करते है
तारों से बातें
किया करते हैं
काश वो प्रेम
फिर
देख सकें.

परिचय :- शिवदत्त डोंगरे (भूतपूर्व सैनिक)
पिता : देवदत डोंगरे
जन्म : २० फरवरी
निवासी : पुनासा जिला खंडवा (मध्य प्रदेश)
सम्मान : राष्ट्रीय हिंदी रक्षक मंच इंदौर द्वारा “समाजसेवी अंतर्राष्ट्रीय सम्मान २०२४” से सम्मानित
घोषणा पत्र : प्रमाणित किया जाता है कि रचना पूर्णतः मौलिक है।

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