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सियासत

छत्र छाजेड़ “फक्कड़”
आनंद विहार (दिल्ली)
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सियासत
जाल है मकड़ी का
साम-दाम-दंड-भेद
आधार स्तंभों पर
टिका महल सियासत का…..

पहला और अंतिम
लक्ष्य है पाना सत्ता
येन केन प्रकारेण
बचाना है अस्तित्व
ले कर सहारा सत्ता का…..

कहीं छुप कर
कहीं खुल कर
नदी के दो पाट
यहाँ कौन किसका
सियासत में रिश्तों का आधार
जुर्म सदा सहभागी सत्ता का….

सिद्धांत सदा ताक पर
सलामत रहे सदा सत्ता
कत्ल कर देते बाप-भाई का
मात्र पाने को सत्ता
हम हैं आपके कौन
यही है मूल मंत्र सत्ता का….

कर दी गई है तुलना
गणिका से…. मगर
गणिकाओं के भी उसूल होते हैं
सिद्धांत हीन होते सत्ता लोभी
पूर्ण हो महत्वाकांक्षा
यही सिद्धांत होता है सत्ता का…!

परिचय :- छत्र छाजेड़ “फक्कड़”
निवासी : आनंद विहार, दिल्ली
विशेष रूचि : व्यंग्य लेखन, हिन्दी व राजस्थानी में पद्य व गद्य दोनों विधा में लेखन, अब तक पंद्रह पुस्तकों का प्रकाशन, पांच अनुवाद हिंदी से राजस्थानी में प्रकाशित, राजस्थान साहित्य अकादमी (राजस्थान सरकार) द्वारा, पत्र पत्रिकाओं व समाचार पत्रों में नियमित प्रकाशन, राजस्थानी लोक गीतों के लिए प्रसिद्ध कंपनी “वीणा कैसेटस” के दो एलबमों में सात गीत संगीतबद्ध हुये हैं।
सम्मान : “राजस्थानी आगीवान” सम्मान से सम्मानित
श्री गंगानगर के सृजन साहित्य संस्थान का सृजन साहित्य सम्मान व
सरदारशहर गौरव (साहित्य) सम्मान व अनेक अन्य सम्मानरा
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।

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