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अर्द्धनारीश्वर

श्रीमती क्षिप्रा चतुर्वेदी
लखनऊ (उत्तर प्रदेश)
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रूप लिया अर्द्धनारीश्वर का,
शिव-शक्ति कहलाते,
शिव प्रारम्भ शक्ति है ब्रह्मांड
तभी तो अर्द्धनारीश्वर कहलाते!!

आधा भाग नर का,
आधा बना नारी का,
शिव बिन शक्ति
अधूरी- शक्ति बिन
शिव अधूरे हो जाते!!

प्रश्न एक कौंधा
मन मे बार बार,
पुरुष का रूप लेकर
जो करते नारी सा शृंगार,
कौन हैं ये लोग,
क्यों दर दर पाते
तिरस्कार!!

घर घर आशीर्वाद पहुंचाते,
बधाई के गीत गाते,
फिर भी समाज से
बहिष्कृत हो स्नेह
को तरसते!

आसान नहीं इनका जीवन,
हर मोड़ पर चुनौतियां आती,
तिल तिल दम तोड़ते,
शिव शक्ति का सृजन ये,
किन्नर कहलाते!

अर्द्धनारीश्वर जब
घर-घर पूजे जाते
ईश्वर की ही रचना हैं ये,
फिर क्यों अधूरे कहलाते??

प्रश्न बड़ा है समाज के
ठेकेदारों से मेरा,
क्यों नहीं इनको हम
अपनों जैसा अपनाते???

परिचय :- श्रीमती क्षिप्रा चतुर्वेदी
पति : श्री राकेश कुमार चतुर्वेदी
जन्म : २७ जुलाई १९६५ वाराणसी
शिक्षा : एम. ए., एम.फिल – समाजशास्त्र, पी.जी.डिप्लोमा (मानवाधिकार)
निवासी : लखनऊ (उत्तर प्रदेश)
सम्मान : राष्ट्रीय हिंदी रक्षक मंच इंदौर द्वारा “जीवदया अंतर्राष्ट्रीय सम्मान २०२४” से सम्मानित
विशेष : साहित्यिक पुस्तकें पढ़ने के शौक ने लेखन की प्रेरणा दी और विगत ६-७ वर्षों से अपनी रचनाधर्मिता में संलग्न हैं।
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।

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