Monday, January 12राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर आपका स्वागत है... अभी सम्पर्क करें ९८२७३६०३६०

यादें

प्रो. डॉ. शरद नारायण खरे
मंडला, (मध्य प्रदेश)
********************

साल जा रहा देकर हमको न, याद में ठहरे लोग।
भोले-भाले, साथ निभाते, भले-बुरे सब लोग।।

स्मृतियाँ कुछ मीठी होतीं, तो कुछ कड़वी होतीं,
समय बीतता, पर यादें में, अज़ब-निराले लोग।

अरमानों में रंग भरे हैं, तो कुछ अति फीके,
हाथ मिलाते, नेह निभाते, प्रीति जताते लोग।

कर्म-भाग्य ने मिलकर के ही, परिणामों को सौंपा,
मित्र बन गये अनजाने में, आगे बढ़कर लोग।

भूल सकूँगा नहीं किसी को, जिन्हें विगत ने पाया,
सदा ही ठहरे रहेंगे यूँ ही, सदा सुहाते लोग।

जीवन की गाड़ी चलती है, मिलते लोग-बिछुड़ते,
यादों में सब रहें सुरक्षित, प्रेम बहाते लोग।

लौट नहीं आता है बीता, बीती बातें शेष,
दूर हो गये,या बिछुड़े वे, याद समाते लोग।

जीवन की रफ़्तार तेज है, भाग रहा है रोज़,
अच्छी स्मृतियाँ का है वंदन, जिनमें ठहरे लोग।।

परिचय :- प्रो. डॉ. शरद नारायण खरे
जन्म : २५-०९-१९६१
निवासी : मंडला, (मध्य प्रदेश)
शिक्षा : एम.ए (इतिहास) (मेरिट होल्डर), एल.एल.बी, पी-एच.डी. (इतिहास)
सम्प्रति : प्राध्यापक व विभागाध्यक्ष इतिहास/प्रभारी प्राचार्य शासकीय जेएमसी महिला महाविद्यालय
प्रकाशित रचनाएं व गतिविधियां : पांच हज़ार से अधिक फुचकर रचनाएं प्रकाशित
प्रसारण : रेडियो, भोपाल दूरदर्शन, ज़ी-स्माइल, ज़ी टी.वी., स्टार टी.वी., ई.टी.वी., सब-टी.वी., साधना चैनल से प्रसारण।
संपादन : ९ कृतियों व ८ पत्रिकाओं/विशेषांकों का सम्पादन। एम.ए.इतिहास की पुस्तकों का लेखन
सम्मान/अलंकरण/ प्रशस्ति पत्र : देश के लगभग सभी राज्यों में ७०० से अधिक सारस्वत सम्मान/ अवार्ड/ अभिनंदन। म.प्र.साहित्य अकादमी का अखिल भारतीय माखनलाल चतुर्वेदी अवार्ड (५१०००/ रु.)
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *