शिव बसे हैं मेरे दिल में
प्रो. डॉ. शरद नारायण खरे
मंडला, (मध्य प्रदेश)
********************
शिव बसे हैं मेरे दिल में किस्मत जगी।
शिव करे हैं सुमंगल किस्मत जगी।।
चेतना, कामना, भावना पल्लवित।
जिन्दगी को नया मोड़ किस्मत जगी।।
शिव की नगरी, बनी मेरी कुटिया अभी।
बनके मंदिर सुसज्जित बहुत है सजी।।
शिव बसे हैं मेरे दिल में किस्मत जगी।
शिव बने हैं मेरे नाथ किस्मत जगी।।
अब नहीं पीर, मातम, निराशा बची।
जिन्दगी को नवल एक भाषा मिली।।
माह सावन का है शिवजी करते दया।
इक नये राग से अब तो सरगम सजी।।
गीत, गजलों, भजन की हैं स्वरलहरियाँ।
मांगलिक-शुभ की गुंजित सुखद ध्वनियाँ।।
शिव बसे हैं मेरे दिल में किस्मत जगी।
शिव बने हैं परमधाम, किस्मत जगी।।
परिचय :- प्रो. डॉ. शरद नारायण खरे
जन्म : २५-०९-१९६१
निवासी : मंडला, (मध्य प्रदेश)
शिक्षा : एम.ए (इतिहास) (मेरिट होल्डर), एल.एल.बी, पी-एच.डी. (इतिहास)
सम्प्रति ...

