आशा भोंसले जी को विनम्र श्रद्धांजलि
प्रो. डॉ. शरद नारायण खरे
मंडला, (मध्य प्रदेश)
********************
प्रखर सुरमयी गायिका, सचमुच दिव्य महान।
आशा ताई का करें, दिशा-दिशा गुणगान।।
आशा जी के सुर सजें, तो गूँजे ब्रम्हांड।
महिमा में लिखते चलो, चाहें जितने कांड।।
आशा जी संगीत थीं, सरस्वती का रूप।
आठ दशक देती रहीं, सुखद सुरों की धूप।।
आशा जी का यह गमन, हम सब हुए उदास।
साज़ सिसकते आज तो, टूट गई है आस।।
आशा जी जीवित सदा, जब तक है संगीत।
हर साधक की चेतना, बनी रहेंगी मीत।।
धूमिल हो सकता नहीं, आशा जी का नाम।
वे तो थीं संगीत की, सच में पावन धाम।।
गाते-गाते ही गईं, लिया न कभी विराम।
आशा जी की वंदना, होगी सुबहोशाम।।
आशा जी आवेग थीं, लिए हुए उल्लास।
अब होगा बैकुंठ में, उनका पावन वास।।
परिचय :- प्रो. डॉ. शरद नारायण खरे
जन्म : २५-०९-१९६१
निवासी : मंडला, (मध्य प्रदेश)
शिक्षा : एम.ए (इतिहास) (मेरिट होल्डर), ए...

