पितृ नमः
प्रो. डॉ. शरद नारायण खरे
मंडला, (मध्य प्रदेश)
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आशीषें देने धरती पर, पितर पहुँच ही जाते।
श्राद्ध पक्ष में पिंडदान से, पितर तृप्त हो जाते।
पितर देव रूपों में होते, सदा भला ही करते।
आशीषों से सदा हमारा, पल में घर वो भरते।।
साथ सदा ही देखो अपने, शुभ-मंगल ले आते।
श्राद्ध पक्ष में पिंडदान से, पितर तृप्त हो जाते।।
क्वार मास का पखवाड़ा तो, पितरों को है लाता।
श्रद्धा और नेह के सँग में, पितरों से मिलवाता।।
पितर हमारे कोमल दिल के, बस मंगल बरसाते।
श्राद्ध पक्ष में पिंडदान से, पितर तृप्त हो जाते।।
रीति-नीति कहती है हमसे, हम चोखे हो जाएँ।
भाव सँजो लें उर में अपने, श्रद्धा के गुण गाएँ।।
जीवन का हर क्षण महकेगा, शुभ के पल हैं आते।
श्राद्ध पक्ष में पिंडदान से, पितर तृप्त हो जाते।।
तर्पण-अर्पण,पूजा-वंदन, अभिनंदन की बेला।
देवलोक के पितर धरा पर, आकर भरते मेला।।
ख़...

