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Tag: प्रो. डॉ. शरद नारायण खरे

पितृ नमः
गीत

पितृ नमः

प्रो. डॉ. शरद नारायण खरे मंडला, (मध्य प्रदेश) ******************** आशीषें देने धरती पर, पितर पहुँच ही जाते। श्राद्ध पक्ष में पिंडदान से, पितर तृप्त हो जाते। पितर देव रूपों में होते, सदा भला ही करते। आशीषों से सदा हमारा, पल में घर वो भरते।। साथ सदा ही देखो अपने, शुभ-मंगल ले आते। श्राद्ध पक्ष में पिंडदान से, पितर तृप्त हो जाते।। क्वार मास का पखवाड़ा तो, पितरों को है लाता। श्रद्धा और नेह के सँग में, पितरों से मिलवाता।। पितर हमारे कोमल दिल के, बस मंगल बरसाते। श्राद्ध पक्ष में पिंडदान से, पितर तृप्त हो जाते।। रीति-नीति कहती है हमसे, हम चोखे हो जाएँ। भाव सँजो लें उर में अपने, श्रद्धा के गुण गाएँ।। जीवन का हर क्षण महकेगा, शुभ के पल हैं आते। श्राद्ध पक्ष में पिंडदान से, पितर तृप्त हो जाते।। तर्पण-अर्पण,पूजा-वंदन, अभिनंदन की बेला। देवलोक के पितर धरा पर, आकर भरते मेला।। ख़...
हिन्दी मस्तक की बिंदी
गीत

हिन्दी मस्तक की बिंदी

प्रो. डॉ. शरद नारायण खरे मंडला, (मध्य प्रदेश) ******************** हिन्दी हितकर है सदा, हिन्दी तो अभियान है। हिन्दी है मस्तक की बिंदी, हिंदी तो सम्मान है।। हिन्दी में तो आन है, हिन्दी में तो शान है। हिन्दी नित उत्कृष्ट है, हिन्दी सदा महान है।। हिन्दी अपनायें सभी, यही आज अरमान है। कला और साहित्य है, भरा हुआ यशगान है।। हिन्दी गीत, कुंडलिया, कविता, चौपाई की शान है। हिन्दी है मस्तक की बिंदी, हिंदी तो सम्मान है।। हिन्दी में है उच्चता, मनुज सभी इसको मानें। हिन्दी का उत्थान सदा हो, हिन्दी को सब ही जानें।। हिन्दी पर अभिमान हमें हो, हिन्दी अपनायें सब। हिंदी से हम प्रीति लगा लें, मंगलगीत सुनायें सब।। वह हर हिंदी के पथ में जो सचमुच चतुर सुजान है। हिन्दी है मस्तक की बिंदी, हिंदी तो सम्मान है।। हिन्दी में सामर्थ्य भरा है, हिन्दी में है वेग भरा। हिन्दी में ...
तर्पण की हकीकत
कविता

तर्पण की हकीकत

प्रो. डॉ. शरद नारायण खरे मंडला, (मध्य प्रदेश) ******************** मात-पिता प्यासे मरे, अब कर रहे हैं तर्पण। यह तो ढोंग ही दिखता है, दिखावा है अर्पण।। जब जीवित थे मात-पिता तब ही सब ज़रूरत थी। आज तो यह सारी दिखावे से भरी हुई वसीयत है।। जीवित की सेवा का ही तो होता सच्चा मोल है। बाद में दिखती कर्मों में लम्बी, गहरी पोल है।। अब मात-पिता जल कैसे पी सकेंगे, सोचो। अब मात-पिता कैसे भोजन कर सकेंगे, बाल नोचो।। अब तो श्राद्ध करना पूरी तरह से मिथ्या, बेमानी है। यह तो पाखंड भरी हुई एक निरर्थक कहानी है।। सेवा,सु‌श्रूषा जीवित अवस्था की ही बस सच्ची है। नहीं तो सब कुछ बेकार, झूठी और कच्ची है।। जीवन में तो मात-पिता होते हैं देव समान। इसलिए उनके जीवित रहते में ही करो उनकी सेवा-सम्मान।। मात-पिता प्यासे मरे, अब कर रहे तर्पण। ज़रा देखो संतानो तुम आज तो सच का दर्पण।। परिचय :- प्र...
गुरु तुम दिव्य
कविता

गुरु तुम दिव्य

प्रो. डॉ. शरद नारायण खरे मंडला, (मध्य प्रदेश) ******************** शिक्षक तुम तो हो गुरू, तुम से ही उत्थान। गुरु बन तुम ने ही रचा, जीवन का सम्मान।। शिक्षक से आलोक है, शिक्षक से संसार। शिक्षक से ही शिष्य को, मिलता है उपहार।। तुमने दिया विवेक तो, हुआ सत्य का भान। तुमसे ही है दिव्यता, गुरुवर ऐ भगवान।। खिलता है जीवन तभी, जब गुरुवर हैं संग। कर देते जो ज़िन्दगी, सचमुच में नवरंग।। यदि गुरुवर हैं संग तो, मैं नित ही बलवान। उनसे ही तो बल मिले, हो जीना आसान।। बिना ज्ञान नहिं चेतना, जीवन जाता हार। गुरु हैं जहाँ, रहे वहाँ, नित चोखा उजियार।। गुरु देते संस्कार नित, कर देते निर्माण। नहीं कभी लगते यहाँ, मानव को तब बाण।। हर दुर्गुण को दूर करे, लाते मंगलगान। गुुरु से ही जीवन हँसे, रह पाती है आन।। परिचय :- प्रो. डॉ. शरद नारायण खरे जन्म : २५-०९-१९६१ निवासी : मंडला, (मध्य प्रद...
गणेश-वंदना
स्तुति

गणेश-वंदना

प्रो. डॉ. शरद नारायण खरे मंडला, (मध्य प्रदेश) ******************** हे! विघ्नविनाशक, बुद्धिप्रदायक, नीति-ज्ञान बरसाओ। गहन तिमिर अज्ञान का फैला, नव किरणें बिखराओ।। कदम-कदम पर अनाचार है, झूठों की है महफिल। आज चरम पर पापकर्म है, बढ़े निराशा प्रतिफल।। एकदंत हे ! कपिल-गजानन, अग्नि-ज्वाल बरसाओ। गहन तिमिर अज्ञान का फैला, नव किरणें बिखराओ।। मोह, लोभ में मानव भटका, भ्रम के गड्ढे गहरे। लोभी, कपटी, दम्भी हंसते हैं विवेक पर पहरे।। रिद्धि-सिद्दि तुम संग में लेकर, नवल सृजन सरसाओ। गहन तिमिर अज्ञान का फैला, नव किरणें बिखराओ।। जीवन तो अब बोझ हो गया, तुम वरदान बनाओ। नारी की होती उपेक्षा, आकर मान बढ़ाओ।। मंगलदायी, हे ! शुभकारी, अमिय आज बरसाओ। गहन तिमिर अज्ञान का फैला, नव किरणें बिखराओ।। भटक रहा मानव राहों में, गहन तिमिर का आलम। आया है पतझड़ जोरों पर, पीड़ा का है मौसम।। प्रथम पूज...
भाई-बहन का प्यार
दोहा

भाई-बहन का प्यार

प्रो. डॉ. शरद नारायण खरे मंडला, (मध्य प्रदेश) ******************** राखी की फैली महक, बँध जाने के बाद। रक्षा की थी बात जो, फिर से वह आबाद।। नेहभाव पुलकित हुए, पुष्पित है अनुराग। टीका, रोली, आरती, सचमुच में बेदाग।। मीलों चलकर आ गया, इक पल में तो पर्व। संस्कार मुस्का रहे, मूल्य कर रहे गर्व।। अनुबंधों में हैं बँधे, रिश्तों के आयाम। मानो तो बस हैं यहीं, पूरे चारों धाम।। सावन तो रिमझिम झरे, बाँट रहा अहसास। बहना आ पाई नहीं, भैया हुआ उदास।। एक लिफाफा बन गया, आज हर्ष-उल्लास। आएगा कब डाकिया, टूट रही है आस।। भागदौड़ बस है बची, केवल सुबहोशाम। धागे ने सबको दिया, नवल एक पैग़ाम।। खुशियों के पर्चे बँटे, ले धागों का नाम। बचपन है अब तो युवा, यादें करें सलाम।। दीप जला अपनत्व का, सम्बंधों के नेग। भावों का अर्पण "शरद", आशीषों का वेग।। परिचय :- प्रो. डॉ. शरद नारायण खरे जन्म...
श्रीकृष्णावतार
दोहा

श्रीकृष्णावतार

प्रो. डॉ. शरद नारायण खरे मंडला, (मध्य प्रदेश) ******************** कृष्ण जन्मदिन मांगलिक, एक सुखद उपहार। बिखरा सारे विश्व में, गहन सत्य का सार।। कृष्ण जन्म दिन दे खुशी, सौंपे हमको धर्म। देवपुरुष सिखला गए, करना सबको कर्म।। कृष्ण जन्मदिन रच रहा, गोकुल में उल्लास। जिसने सबको सीख दी, रखना हर पल आस।। कृष्ण जन्मदिन सत्य का, बना एक उद्घोष। कंस हनन कर हर लिया, कान्हा ने सब दोष।। कृष्ण जन्मदिन कह रहा, चलो सत्य की राह। नहीं धर्मच्युत हो कभी, तभी बनोगे शाह।। कृष्ण जन्मदिन मति रचे, देता व्यापक न्याय। है दुष्टों पर वार जो, रचे नवल अध्याय।। कृष्ण जन्मदिन पूज्य है, वंदन का है पाठ। बालरूप में चेतना, निश्छल मन का ठाठ।। कृष्ण जन्मदिन रच रहा, राधाजी से नेह। अंतर का आवेग बस, दूर सदा ही देह।। कृष्ण जन्मदिन सदफलित, गीता का नव सार। उजियारे की वंदना, अँधियारे की हार।। कृष्ण ...
भारत माता का वंदन
गीत

भारत माता का वंदन

प्रो. डॉ. शरद नारायण खरे मंडला, (मध्य प्रदेश) ******************** अंधकार में हम साहस के, दीप जलाते हैं। आज़ादी के मधुर तराने, नित हम गाते हैं।। चंद्रगुप्त की धरती है यह, वीर शिवा की आन है। राणाओं की शौर्य धरा यह, पोरस का सम्मान है।। वतनपरस्ती तो गहना है, हृदय सजाते हैं। आज़ादी के मधुर तराने, नित हम गाते हैं।। अपना सब कुछ दाँव लगाकर, जिनने वतन बनाया। अपने हाथों से अपना ही, जिनने कफ़न सजाया।। भारत माता की महिमा की, बात सुनाते हैं। आज़ादी के मधुर तराने, नित हम गाते हैं।। आगे बढकर, निर्भय होकर, जिनने फर्ज़ निभाया। वतनपरस्ती का तो जज़्बा, जिनने भीतर पाया।। हँस-हँसकर जो फाँसी झूले, वे नित भाते हैं। आज़ादी के मधुर तराने, नित हम गाते हैं।। सिसक रही थी माता जिस क्षण, तब जो आगे आए। राजगुरू, सुखदेव, भगतसिंह, बिस्मिल जो कहलाए।। ब्रिटिश हुक़ूमत से टकराकर, प्राण गँवाते हैं। ...
रोटी की महिमा
कविता

रोटी की महिमा

प्रो. डॉ. शरद नारायण खरे मंडला, (मध्य प्रदेश) ******************** भूख से बड़ी वेदना नहीं है यह तो समझो। मिल जाए रोटी यही कामना, यह तो समझो।। भूख तो मानव जीवन का ही है हिस्सा। पेट को भरने का ही तो है देखो सब किस्सा।। पेट भरा हो तो दुनिया लगती अति प्यारी है। भूख के आगे यह सारी दुनिया ही हारी है।। भूख ही तो दुनिया से देखो सारे पाप कराती है। भूख ही तो नित सारे यह संताप बढ़ाती है।। कहते हैं कि कभी भूखे भजन न होय गोपाला। सही बात है रोटी का ही तो सब गड़बड़झाला।। रोटी के आगे तो देखो सब कुछ ही बोना है। रोटी से ही उजला लगता घर का हर कोना है।। रोटी मिलना बहुत देखो भाई बड़ा वरदान है। मिलती रहे सबको रोटी यही आज अरमान है।। भूख से बड़ी वेदना नहीं है, यह तो समझो। रोटी देने से बड़ी संवेदना नहीं है, यह तो समझो।। परिचय :- प्रो. डॉ. शरद नारायण खरे जन्म : २५-०९-१९६१ निवासी :...
नागपंचमी
दोहा

नागपंचमी

प्रो. डॉ. शरद नारायण खरे मंडला, (मध्य प्रदेश) ******************** नागपंचमी पर्व का, सुंदर बहुत विधान। संस्कारों की देह में, नैतिकता के प्रान।। नाग पूजकर पुण्य ले, खुश होते हैं ईश। मिले प्रकृति का साथ नित, मिलता है आशीष।। नाग जीव सादा-सरल, जीने का अधिकार। जब तक छेड़ो मत उसे, देता नहिं फुंफकार।। दूध पिला पूजन करो, वंदित हो अब नाग। सब जीवों से हम रखें, नित चोखा अनुराग।। पान-बेल का मान कर, चौरसिया दिन ख़ास। गहो पान उपयोगिता, ले चोखे अहसास।। बीन बजे मौसम बने, खुश होता परिवेश। नाग-कृपा से नित रहे, परे सतत् ग़म, क्लेश।। हलुआ-पूरी कर ग्रहण, गाओ मंगल गीत। नागपंचमी आपको, देती है नित जीत।। हिन्दू का तो पर्व यह, रखता बहुत विवेक। पूजन को अब साधकर, बने मनुज तुम नेक।। परिचय :- प्रो. डॉ. शरद नारायण खरे जन्म : २५-०९-१९६१ निवासी : मंडला, (मध्य प्रदेश) शिक्षा : एम.ए (इतिह...
एक  चिंतन
कविता

एक चिंतन

प्रो. डॉ. शरद नारायण खरे मंडला, (मध्य प्रदेश) ******************** कर्म बड़ा या जाति प्रश्न‌ यह तो चोखा है। कर्म बड़ा होता मानो, नहीं कोई धोखा है।। कर्म से जीवन बनता, यह ही सब मानो। कर्म की गति-मति को, सब ही पहचानो।। ऊँचनीच में रखा नहीं कुछ, सब बेमानी। समता को धारण करने की क्यों न है ठानी।। आज नया चिंतन, नव जीवन लाना होगा। जुड़ गया जो गुलशन फिर महकाना होगा।। ईश्वर की सब रचनाएँ सब हैं अति सुंदर। आज बना पावनता से घर को मंदिर।। कर्म सदा शोभित होता है विजय उसी की। जिसने नैतिकता नहीं मानी,है क्षय उसकी।। सोच सही होगा तब ही जीवन महकेगा। होगा सब का भला और जीवन चहकेगा।। सभी आदमी सदा बराबर, यह ही साँचा। यह कहते वे, जिन ने गीता ग्रंथ को बाँचा।। परिचय :- प्रो. डॉ. शरद नारायण खरे जन्म : २५-०९-१९६१ निवासी : मंडला, (मध्य प्रदेश) शिक्षा : एम.ए (इतिहास) (मेरिट होल्डर), ए...
दुर्योधन का हास
दोहा

दुर्योधन का हास

प्रो. डॉ. शरद नारायण खरे मंडला, (मध्य प्रदेश) ******************** हुआ महाभारत तभी, वजह बहुत थी खास। द्रुपदसुता ने था किया, दुर्योधन का हास।। कभी न करना और का, तुम किंचित उपहास। वजह बनेगी हो कलह, टूटेगा विश्वास।। दुर्योधन का अति कपट, झगड़ा लाया ख़ूब। वजह यही थी युद्ध की, सूखी नेहिल दूब।। पाप वजह बनता सदा, रच देता संताप। अन्यायी आवेग को, कौन सकेगा माप।। रीति, नीति से गति मिले, बनते ये शुभ नेग। झूठ बने नित ही वजह, चले युद्ध की तेग।। किया शकुनि ने छल बहुत, हुआ इसलिए युद्ध। यही वजह टकराव की, हुए कृष्ण भी क्रुद्ध।। झूठ वजह अवसान की, अपनाओ नित साँच। जो सत् के पथ नित चलें, उन पर कभी न आँच।। नित अधर्म बनकर वजह, रच देता है शोक। इसीलिए तो धर्म नित, देता हमको देता रोक।। परिचय :- प्रो. डॉ. शरद नारायण खरे जन्म : २५-०९-१९६१ निवासी : मंडला, (मध्य प्रदेश) शिक्षा : एम.ए ...
हरदम पिता महान
दोहा

हरदम पिता महान

प्रो. डॉ. शरद नारायण खरे मंडला, (मध्य प्रदेश) ******************** हिमगिरि जैसे भव्य हैं, रहते सीना तान। वेदों ने भी तो कहा, हरदम पिता महान।। पिता उच्च आकाश से, संतानों के ईश। जब तक जीवित हैं पिता, कभी न झुकता शीश।। सुख-दुख में अविचल रहें, आँसू का है त्याग। जेब भरी खाली रहे, पर हाँ से अनुराग।। पिता रूप संघर्ष का, संरक्षक का वेग। कैसे भी हालात हों, पिता मांगलिक नेग।। बुरी नज़र पर मार हैं, हर संकट पर वार। पिता दिवाकर से लगें, फैलाते उजियार।। नेह भरे रहते पिता, दिखते सदा कठोर। संतानों का भाग्य है, नाचे मन का मोर।। पिता सुरीला राग हैं, भजन, आरती गान। जब तक जीवित हैं पिता, संतानों में जान।। एक दिवस केवल नहीं, युगों-युगों सम्मान। पिता करें संतान के, पूरे सब अरमान।। पिता प्रेम का नाम है, पिता नाम कर्तव्य। सकल जगत में आज तो, पितु गाथा है श्रव्य।। पितु को खोना...
ससुराल के बीते दिन
दोहा, हास्य

ससुराल के बीते दिन

प्रो. डॉ. शरद नारायण खरे मंडला, (मध्य प्रदेश) ******************** स्वर्णिम युग ससुराल का, याद करे दामाद। पर अब कुछ भी है नहीं, केवल है अवसाद।। ख़ातिरदारी है नहीं, अब सूना मैदान। बिलख रहे दामाद जी, रुतबे का अवसान।। स्वर्णिम युग पहले रहा, खाते थे पकवान। अब तो सारे मिटे गए, ससुराली अरमान।। कितना प्यारी थी कभी, जिनको तो ससुराल। उनको दुख अब सालता, अब वह गुज़रा काल।। अब ख़ातिरदारी नहीं, शेष बची है याद। अब मुरझाने लगे गया, पौधा तो बिन खाद।। स्वर्णिम युग ससुराल का, केवल है इतिहास। दर्द घिरे दामाद जी, जीते अब बिन आस।। पहले हलुआ, पूड़ियाँ, रबड़ी, काजू, खीर। अब तो केवल हाथ है, कसक, कष्ट सँग पीर।। स्वर्णिम युग ससुराल का, शायद आता लौट। जैसा पहले दौर था, वैसा हो फिर हौट।। परिचय :- प्रो. डॉ. शरद नारायण खरे जन्म : २५-०९-१९६१ निवासी : मंडला, (मध्य प्रदेश) शिक्षा : एम.ए ...
सदाचार के पथ पर
चौपाई

सदाचार के पथ पर

प्रो. डॉ. शरद नारायण खरे मंडला, (मध्य प्रदेश) ******************** सदाचार के पथ पर चलना, कभी न फिर तुम आँखें मलना। जीवन में अच्छाई वरना, हर दुर्गुण को नित ही हरना।। कभी काम खोटा नहिं करना, नेह-नीर होकर तुम झरना। हरदम ही बनना उजियारा, करना दूर सकल अँधियारा।। नैतिकता के होकर रहना, मानवता का पथ ही वरना। सबकी सेवा में जुट जाना, जीवन अपना धन्य बनाना।। सच्चाई से जीवन बनता, दुर्गुण तो खुशियों को हनता। चाल-चलन मर्यादित रखना, कभी नहीं कड़वे फल चखना।। सदाचार से प्रभु खुश होते, ऐसे जन बिलकुल नहिं रोते। गिरे हुए तुम कर्म न करना, बस अच्छाई को ही वरना।। मन को शोधित करते रहना, गंगाजल बनकर के बहना।। पापों को बिलकुल तज देना, सद्कर्मों को तुम गह लेना।। नैतिकता से खुशहाली हो, उपवन महकें,खुश माली हो। सद्चरित्र से सद्गति होती, मानवता किंचित नहिं रोती।। नैतिकता से सं...
आतंक और विनाश
दोहा

आतंक और विनाश

प्रो. डॉ. शरद नारायण खरे मंडला, (मध्य प्रदेश) ******************** आतंक मिटाता ज़िन्दगी, करता सदा विनाश, यह समझें हैवान यदि, तो बदलेगा मौसम। ख़ूनखराबा कब तक होगा, बतलाओ तुम मुझको, पहलगाम जैसी जगहों पर होगा कब तक मातम।। जिसने तुमको भड़काया है, समझो उनकी करनी, मूर्ख बनाकर वे यूँ सबको, करें मौत का खेला। नहीं जान लेने में हिचकें, चिंतन है शैतानी, बरबादी भाती है जिनको, करते रोज़ झमेला।। लानत है आतंक कर्म पर, मौत का जो उत्सव है, कब तक लाशें और गिरेगीं, कब तक सब रोएंगे। असुर मनुज की बस्ती में हों, तो कैसे सुख-चैना, कैसे हम सब शांत चित्त हो, फिर तो सो पाएंगे।। यही चेतना, संदेशा है, अविलम्ब जागना होगा, अब तो इस आतंक को हमको, अभी रोकना होगा। यही जागरण, वक़्त कह रहा, आतंक की अब इतिश्री हो, नगर-गांव में हर्ष पले अब, शौर्य रोपना होगा।। आतंक मानसिकता हैवानी, म...
बलिदान वीर जवानों का
कविता

बलिदान वीर जवानों का

प्रो. डॉ. शरद नारायण खरे मंडला, (मध्य प्रदेश) ******************** बलिदान वीर जवानों का, बेकार नहीं जाने देंगे। हम भारत माँ की आँखों में अश्रु नहीं आने देंगे।। हैं वीर सिपाही मतवाले, उनके यश को नित गाएंगे। हम अपनी माता मातृभूमि को किंचित नहीं लजाएँगे।। हम अब अपनी पुण्य धरा पर, आतंकी ना आने देंगे। बलिदान वीर जवानों का, बेकार नहीं जाने देंगे।। हरकत जो नापाक हुई है, उसका बदला ले डाला। हमने घर में घुसकर मारा, पल उनका आज किया काला।। अब हम आतंकी दुश्मन को, मल्हार नहीं गाने देंगे। बलिदान वीर जवानों का, बेकार नहीं जाने देंगे।। हम शूरवीर,हम महाबली, हम दुश्मन पर भारी पड़ते। आ जाता है भूचाल तभी, हम ज़िद पर जब भी हैं अड़ते।। हम कायर, पापी, अधम, नीच को, अब घर में ना आने देंगे। बलिदान वीर जवानों का, बेकार नहीं जाने देंगे। परिचय :- प्रो. डॉ. शरद नारायण खरे जन्म : २५-...
प्रभु चित्रगुप्त जी
कविता

प्रभु चित्रगुप्त जी

प्रो. डॉ. शरद नारायण खरे मंडला, (मध्य प्रदेश) ******************** कलम-देवता है नमन्, विनती बारम्बार। हर लेना अँधियार सब, देना नित उजियार।। न्याय देवता तुम भले, पाप-पुण्य का लेख। प्राणी की तुम खेंचते, बिल्कुल सच्ची रेख।। ब्रम्हा ने तुमको जना, हो तुम मानस पूत। तुम हो धर्माधर्म के, सबसे सच्चे दूत।। कायस्थों के पूर्वज, सबसे चतुर सुजान। कलम चलाते सत्य की, देते सबको ज्ञान।। धर्मराज के संग में, धारण करके मर्म। मृत को बतलाते सदा, कैसे उसके कर्म।। बता रहे हैं लेखनी, रखती पैनी धार। साँच सदा हो साथ में, तो उजला संसार।। चित्रगुप्त को पूजना, लेकर मंगलभाव। रखना दिल में नीति का, हरदम चोखा ताव।। बारह पूतों ने किया, सदा सुपावन काम। चित्रगुप्त जी! आप तो, लगते तीरथ धाम।। चित्रगुप्त जी!आप तो, करते चोखा न्याय। आप सदा हैं प्रेरणा, यह सबका अभिप्राय।। प्रकट हुए हो देव तुम, ...
जय-जय हे बजरंगबली
भजन

जय-जय हे बजरंगबली

प्रो. डॉ. शरद नारायण खरे मंडला, (मध्य प्रदेश) ******************** सदा सहायक देव प्रबलतम, परमवीर हनुमाना। संकटमोचन, शत्रु विनाशक, जय-जय दयानिधाना।। मातु अंजनालाल शौर्यमय, असुरों को संहारें। रामकाज करने को आतुर, पाप जगत के मारें।। सूर्य निगलकर बने अनूठे, वायुपुत्र देवंता। महावीर सुग्रीव सहायक, करें दुःखों का अंता।। भयसंहारक, मंगलकारी, पूजन बहुत सुहाना। संकटमोचन, शत्रु विनाशक, जय-जय दयानिधाना।। दहन करी लंका हे ! देवा, तुम हो प्रलयंकारी। परम शक्तियाँ तुम में रहतीं, बनकर के साकारी।। हे हनुमंता, हे भगवंता, तेरा रूप निराला। हर दिन है उजला हो जाता, हो कितना भी काला।। जीवन सुमन खिलाते हरदम, जग ने तुमको माना। संकटमोचन, शत्रु विनाशक, जय-जय दयानिधाना।। रामदूत, अतुलित बलधामा, जीवन देने वाले। सब कुछ तुम गतिमय कर देते, काट व्यथा के जाले।। सीता की कर खोज बन गए, तुम तो एक कहानी। ...
शब्दों का मेला
दोहा

शब्दों का मेला

प्रो. डॉ. शरद नारायण खरे मंडला, (मध्य प्रदेश) ******************** शब्द-शब्द है चेतना, शब्द-शब्द झंकार। मिले सृष्टि को जागरण, शब्द रचें आकार।। शब्द विश्व का रूप है, शब्द बने उजियार। शब्द उच्च उर्जा लिए, मेटे हर अँधियार।। शब्द ब्रम्ह हैं, ईश हैं, शब्द सकल ब्रम्हांड। शब्द रचें अध्याय नित, मानस के सब कांड।। शब्द तत्व हैं, सार हैं, शब्द सृजन अभिराम। शब्द सतत गतिशील हैं, सचमुच हैं अविराम।। शब्द नाद, सुर, ताल हैं, शब्द प्रीति, अनुराग। शब्द गान, पूजन-भजन, शब्द दाह हैं, आग।। शब्द नेह हैं, प्यार हैं, शब्द गहन अभिसार। शब्द युगों तक गूँजते, बनकर के आसार।। शब्द भाव, अभिव्यक्ति हैं, शब्द नवल आयाम। सरिता के आवेग हैं, शब्द देवता-धाम।। शब्द मनुजता, वंदना, शब्द गीत, नवगीत। शब्द वाक्य के संग में, बन जाते मनमीत।। शब्द खगों के स्वर बनें, हर अधरों के राग शब्दों में संवाद है,...
मानवता के प्रहरी तुम हो
गीत

मानवता के प्रहरी तुम हो

प्रो. डॉ. शरद नारायण खरे मंडला, (मध्य प्रदेश) ******************** मानवता के प्रहरी तुम हो, तीर्थंकर भगवान तुम। सत्य, धर्म के संरक्षक हो, न्याय, नीति का मान तुम।। गहन तिमिर तो हर्षाता अब, प्यार दिलों से गायब है। दौर कह रहा झूठा-कपटी, ही बनता अब नायब है।। करुणा को फिर से गहरा दो, महावीर तुम ताप हो। पावनता के उच्च शिखर हो, आप असीमित माप हो।। काम, क्रोध के प्रखर विजेता, अविवेकी को ज्ञान तुम। सत्य, धर्म के संरक्षक हो, न्याय, नीति का मान तुम।। इंद्रियविजेता, सत्यपथिक हो, दया-नेह के सागर हो। उच्च चेतना, नव विचार हो, मीठे जल की गागर हो।। भटक रहा है मानव उसको, तुम दिखला लो रास्ता। नहीं रखे जिससे मानव अब, अदम कार्य से वास्ता।। पाप कर्म के हंता हो तुम, युग को नवल विहान तुम। सत्य, धर्म के संरक्षक हो, न्याय, नीति का मान तुम।। महावीर हे! वर्धमान तुम, फिर से जगत जगा...
हनुमत-वंदना
दोहा

हनुमत-वंदना

प्रो. डॉ. शरद नारायण खरे मंडला, (मध्य प्रदेश) ******************** संकटमोचन देव हैं, कहते हम हनुमान। असुर मारते, धर्म हित, जय हो दयानिधान।। सदा राममय ही रहें, पावन हैं हनुमान। जो उनके चरणों पड़े, उसकी रखते आन।। रुद्र अंश धारण किया, राम हितैषी तात। जय-जय हो हनुमान जी, देव सदा सौगात।। भूत-पिशाचों पर कहर, हर संकट पर मार। जहाँ रहें हनुमानजी, वहाँ पले उजियार।। वायु पुत्र शत्-शत् नमन्, विनती बारम्बार। करना मुझ पर तुम दया, करो मुझे भव पार।। लाल अंजना तुम सदा, रखना सिर पर हाथ। कैसी भी विपदा पड़े, नहीं छोड़ना साथ।। हनुमत तुम बलधाम हो, पावन और महान। सारा जग तुम पर करे, हे भगवन् अभिमान।। राम काज करके बने, रामदुलारे आप। वेग, शौर्य, प्रतिभा, समझ, कौन सकेगा माप।। कलियुग के तुम आसरे, परमबली वरदान। ला दो इस युग में सुखद, फिर से नया विहान।। "शरद" करे विनती सतत्, वंदन ...
महावीर स्वामी
दोहा

महावीर स्वामी

प्रो. डॉ. शरद नारायण खरे मंडला, (मध्य प्रदेश) ******************** वर्धमान महावीर को, सौ-सौ बार प्रणाम। जैन धर्म का कर सृजन, रचे नवल आयाम।। तीर्थंकर भगवान ने, फैलाया आलोक। परे कर दिया विश्व से, पल में सारा शोक।। महावीर ने जीतकर, मन के सारे भाव। जीत इंद्रियाँ पा लिया, संयम का नव ताव।। कुंडग्राम का वह युवा, बना धर्म दिनमान। रीति-नीति को दे गया, वह इक चोखी आन।। वर्धमान साधक बने, और जगत का मान। जैनधर्म के ज्ञान से, किया मनुज-कल्याण।। पंच महाव्रत धारकर, दिया जगत को सार। करुणा, शुचिता भेंटकर, हमको सौंपा प्यार।। जैन धर्म तो दिव्य है, सिखा रहा सत्कर्म। धार अहिंसा हम रखें, कोमलता का मर्म।। तीर्थंकर चोखे सदा, धर्म प्रवर्तक संत। अपने युग से कर गए, अधम काम का अंत।। मातु त्रिशला धन्य हैं, दिया अनोखा लाल। जो करके ही गया, सच में बहुत कमाल।। आओ ! हम सत् मार्ग के, बने...
बुरा न मानो होली है
हास्य

बुरा न मानो होली है

प्रो. डॉ. शरद नारायण खरे मंडला, (मध्य प्रदेश) ******************** जीजा ने साली पर मोहित होकर गालों पर गुलाल मला। साली के दिल में भी जीजा के लिए प्रेम का भाव पला।। दोनों चुपके-चुपके खा रहे आँखमिचोली की गोली है। बुरा न मानो होली है।। नेता ने जनता को आश्वासन की जमकर भंग पिलाई है। झक सफेद वस्त्रों पर लगी गहरी कालिख नज़र आई है।। नेता ने सदा ही तो अपनी कुर्सी पर बैठ फैलाई झोली है। बुरा न मानो होली है।। देशभक्ति, जनसेवा के नाम पर, चमक रही आज खाकी है। क्रिकेट की महिमा-गायन के आगे, बिलख रही हाकी है।। पीकर मदमाते मस्तानों की बदली हुई आज बोली है। बुरा न मानो होली है।। रँग खेलते में शर्मा जी ने अपनी पड़ोसन पर लाइन मारी। उधर मिसेज शर्मा भी अपने एक सहकर्मी को दिल हारी।। हो रही देखो जमकर आज मस्तानों में तो प्रेम ठिठोली है। बुरा न मानो होली है।। नई मॉडल अपने सारे वस...
सरहद पर होली
दोहा

सरहद पर होली

प्रो. डॉ. शरद नारायण खरे मंडला, (मध्य प्रदेश) ******************** सरहद पर होली हुई, रक्षा की हुंकार। बहे ख़ून पर देश की, करते हैं जयकार।। खेलें सारे देश के, लोग आज तो रंग। सरहद पर है शौर्य बस, घुसपैठी से जंग।। सरहद पर सैनिक डटे, लेकर शौर्य अबीर। रँग-गुलाल बलिदान का, खेलें सारे वीर।। वतनपरस्ती हँस रही, सम्मानित है तेज। सरहद पर हर वीर है, क़ुर्बानी लबरेज।। याद आ रहे दोस्त सब, यादों में है गाँव। होली पर सरहद डटे, बंकर की है छाँव।। भेजो मंगलकामना, हर सैनिक की ओर। दूरी है परिवार से, होली है बिन शोर।। बंदूकों की है गरज, शौर्य गा रहा फाग। बम्म-धमाके, टेंक ही, होली का अनुराग।। इक-दूजे के माथे पर, मल दी नेह-गुलाल। सरहद पर सैनिक सदा, करते शौर।यह कमाल।। परिचय :- प्रो. डॉ. शरद नारायण खरे जन्म : २५-०९-१९६१ निवासी : मंडला, (मध्य प्रदेश) शिक्षा : एम.ए (इतिहास) (मेरिट ...