नीर से ही जीवन है
प्रो. डॉ. शरद नारायण खरे
मंडला, (मध्य प्रदेश)
********************
नीर लिए आशा सदा, नीर लिए विश्वास ।
नीर से सांसें चल रही, देवों का आभास ।।
अमृत जैसा है सदा, कहते जिसको नीर ।
एक बूँद भी कम मिले, तो बढ़ जाती पीर ।।
नीर बिना जीवन नहीं, अकुला जाता जीव ।
नीर फसल औ' अन्न है, नीर "शरद" आजीव ।।
नीर खुशी है, चैन है, नीर अधर मुस्कान ।
नीर सजाता सभ्यता, नीर बढ़ाता शान ।।
जग की रौनक नीर से, नीर बुझाता प्यास ।
कुंये, नदी, तालाब में, है जीवन की आस ।।
सूरज होता तीव्र जब, मर जाते जलस्रोत ।
घबराता इंसान तब, अनहोनी तब होत ।।
नीर करे तर कंठ नित, दे जीवन को अर्थ ।
नीर रखे क्षमता बहुत, नीर रखे सामर्थ्य ।।
नीर नहीं बरबाद हो, हो संरक्षित नित्य ।
नीर सृष्टि पर्याय है, नीर लगे आदित्य ।।
नीर बादलों से मिले, कर दे धरती तृप्त ।
बिना नीर के प्रकृति यह, हो जाती है तप्त ।।
नीर ...

