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चादर

डॉ. किरन अवस्थी
मिनियापोलिसम (अमेरिका)

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हम अपनी चादर में पैर
समेटे सदियों तक बैठें रहे
धूल का गुबार उनका उड़ा
जो पांव पसारते चले गये
हमने न की कभी शिकायत
वो चादर हमारी उघाड़ते चले गये
इतनी बड़ी थी चादर हमारी
वो काटते चले गये
हम अपना रक्त मानते रहे
हम खुशी से और देते रहे
हम सहिष्णुता से रहते रहे
कुछ फिर भी असहिष्णु होकर
हमें नकारते रहे
बची खुची चादर भी खींचते रहे
हम एक-एक टुकड़ा भी दान कर दें?
चादर तो छोड़ें, स्वयं को दान कर दें?

परिचय :- डॉ. किरन अवस्थी
सम्प्रति : सेवा निवृत्त लेक्चरर
वर्तमान निवासी : मिनियापोलिस, (अमेरिका)
शिक्षा : एम.ए. अंग्रेजी, एम.ए. भाषाविज्ञान, पी.एच.डी. भाषाविज्ञान
सर्टिफिकेट कोर्स : फ़्रेंच व गुजराती।
सम्प्रति : आप राष्ट्रीय हिंदी रक्षक मंच अमेरिका शाखा की अध्यक्षा है।
पुनः मैं अपने देश को बहुत प्यार करती हूं तथा प्रायः देश भक्ति की कविताएं लिखती हूं जो कि समय की‌ मांग भी‌ है। आजकल देशभक्ति लुप्तप्राय हो गई है। इसके पुनर्जागरण के लिए प्रयत्नशील हूं।
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है।


प्रिय मित्र, शुभचिंतक एवं परिवारजन आप सभी को नववर्ष पर हार्दिक शुभकामनाएँ। आशा है इस अवसर पर आप को प्रेषित मेरी नई स्वरचित रचना लिंक को टच कर पढ़ने का कष्ट कर प्रोत्साहित करेंगे एवं कमेंट बॉक्स में अपने विचार रख कविता को लाइक करेंगे …🙏🏻😊💐💐💐 राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि प्रकाशित करवाने हेतु अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, हिंदी में टाईप करके हमें hindirakshak17@gmail.com पर अणु डाक (मेल) कीजिये, अणु डाक करने के बाद हमे हमारे नंबर ९८२७३ ६०३६० पर सूचित अवश्य करें …🙏🏻 राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच का सदस्य बनने हेतु अपने चलभाष पर पहले हमारा चलभाष क्रमांक ९८२७३ ६०३६० सुरक्षित कर लें फिर उस पर अपना नाम और कृपया मुझे जोड़ें लिखकर हमें भेजें…🙏🏻

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