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मृग नयना तेरे

छत्र छाजेड़ “फक्कड़”
आनंद विहार (दिल्ली)
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न रात हुई आज पहली बार
ना तारे ही निकले पहली बार
मगर…
अहसास किया दिल नें
ये तारे महज तारे कहाँ
झाँक रहे हैं
हर तारे से
चंचल मृग नयना तेरे…..

ना पाखी उड़े नभ पहली बार
ना फूलों पे भँवरे डोले पहली बार
मगर…
तेरे मदहोश इशारों ने
जगाये अल्लहड़ अरमान
कमसिन कजरारे ये
बंकिम मृग नयना तेरे……

ना आज बसंत आया पहली बार
ना कोयलिया कूकी पहली बार
मगर…..
सरगम सी उठी
झंकृत हुई पायलिया
बजाये सुरीले सुर
सुलोचन मृग नयना तेरे…..

ना घिरी घटायें आज पहली बार
ना ही चली पवनवा पहली बार
मगर….
चून्नर के लहराने संग
लहराये मधुर मीठे सपने
भीगे भीगे से यौवन सिंधु में
मृदमयी मृग नयना तेरे…..

ना झरने झरे आज पहली बार
ना भीगी लंबी लटें पहली बार
मगर….
भीगी स्याह जुल्फों से
शबनम के कणों सी
लरज लरज ललचाते
शोख जुल्मी मृग नयना तेरे…..

ना साँसे ली आज पहली बार
ना धड़का सीना आज पहली बार
मगर….
भरे हर धड़कन में
उठे तूफान मृदुल सपनों के
जीवन मदिरा से लबरेज
शरारती मृग नयना तेरे…..

ना बँधे रिश्तों मे आज पहली बार
ना चढ़ा खुमार आज पहली बार
मगर….
भरा मधु रिश्तों का
बोझिल पलकों में
अहसास पहले प्यार का
चुपके छलकते मृग नयना तेरे…..

ना उदित है दिनकर पहली बार
ना छायी बहार बागों में पहली बार
मगर….
दिखा गये डगर जीने की
भर उन्माद यौवन में
करे संचार रसीली तरंगों का
उद्दंड हठीले मृग नयना तेरे……

परिचय :- छत्र छाजेड़ “फक्कड़”
निवासी : आनंद विहार, दिल्ली
विशेष रूचि : व्यंग्य लेखन, हिन्दी व राजस्थानी में पद्य व गद्य दोनों विधा में लेखन, अब तक पंद्रह पुस्तकों का प्रकाशन, पांच अनुवाद हिंदी से राजस्थानी में प्रकाशित, राजस्थान साहित्य अकादमी (राजस्थान सरकार) द्वारा, पत्र पत्रिकाओं व समाचार पत्रों में नियमित प्रकाशन, राजस्थानी लोक गीतों के लिए प्रसिद्ध कंपनी “वीणा कैसेटस” के दो एलबमों में सात गीत संगीतबद्ध हुये हैं।
सम्मान : “राजस्थानी आगीवान” सम्मान से सम्मानित
श्री गंगानगर के सृजन साहित्य संस्थान का सृजन साहित्य सम्मान व
सरदारशहर गौरव (साहित्य) सम्मान व अनेक अन्य सम्मानरा
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।


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