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नववर्ष

डॉ. भगवान सहाय मीना
जयपुर, (राजस्थान)
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नववर्ष जगा देगा फिर से,
जीवन में टूटी उम्मीदों को।
वादा कर लेगा हताशा से,
व्यक्ति सपने पूरे करने को।

प्रफुल्लित होगी मन मयूरी,
रंग चढ़ेगा आशा किरणों को।
पल्लवित होगा हृदय चमन,
यूं हौसला मिलेगा कदमों को।

फिर जज्बा जगेगा अंतस में,
कर्मठ बांध लेगा मुट्ठियों को।
आस को परवाज मिलेंगे फिर,
कसूमल रंग नव खुशियों को।

सुदूर क्षितिज से राह मिलेगी,
कमर कसे चल पड़ेंगे लक्ष्य को।
अब सुलझेंगी उलझी गुत्थी,
नवल उमंग मिलेगी कर्मों को।

जोश जुनून उम्मीद उत्साह,
पुनर्जीवित हुये सब नव वर्ष को।
सुखी जीवन वेदना होगी दूर,

परिचय :- डॉ. भगवान सहाय मीना (वरिष्ठ अध्यापक राजस्थान सरकार)
निवासी : बाड़ा पदम पुरा, जयपुर, राजस्थान
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।


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