किताबों के साथ
डॉ. भगवान सहाय मीना
जयपुर, (राजस्थान)
********************
क्या आप जानते है चिंता को,
और पहचानते हो तनाव को।
जीवन में अनुभव किये होंगे,
पीड़ा, बेबसी और मजबूरी को।
डर, घबराहट और परेशानियां,
जगाये रखती होगी देर रात को।
कल की चिंता, व्याकुलता, भय,
आंखों से दूर रखती है निंद को।
सफल नहीं हुआ तो क्या होगा,
कब दूर करूंगा बेरोजगारी को।
लाखों कठिनाइयां है रास्तें में
कैसे संभाल पाऊंगा जिंदगी को।
पुस्तकालय में दत्तचित्त होकर,
हराते है कितने ही विचारों को।
युवा किताबों के साथ पढ़ते है,
घर के विखंडित हालातों को।
उन्हें याद है पिता के सिर चढ़ा,
कर्ज और साहूकार का तकाजा।
ज्ञात है ब्याज की चक्रवृद्धि दर,
क्योंकि दुनिया में दौलत से ही,
परिभाषित है रंक और राजा।
प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी में,
हताशा से गहराई तक टूट जाते है।
आखिरी सीढ़ी तक पहुंचकर,
बिना मंजिल के फ...

