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Tag: डॉ. भगवान सहाय मीना

पंथी पंथ निहार लें
कविता

पंथी पंथ निहार लें

डॉ. भगवान सहाय मीना जयपुर, (राजस्थान) ******************** पंथी पंथ निहार लें, कर ईश्वर का ध्यान। नश्वर है संसार तो, सच को ले पहचान। शब्दों से होता नहीं, भावों का अनुवाद। भाव बसे हैं हृदय में, शब्द करें संवाद। हरित चूनरी ओढ़कर, धरा करें श्रृंगार। मेघ मल्लिका रूपसी, सजती सौ सौ बार। विडम्बना है देश की, न्याय हो रहा जीर्ण। अदालत लाचार हुई, रहें कैसे अजीर्ण। हाड़ कॅंपाती ठंड है, पाला पड़ा तुषार। फसलें सारी जल गई, शीतलहर संचार। भूखे पापी पेट का, करतें रोज जुगाड़। रोजगार के नाम से, तिल का बनता ताड़। मानव तेरी जाति का, कैसे हो उत्थान। काम क्रोध मद लोभ में, लुप्त हुई पहचान। धीरे- धीरे चली वधु, वरमाला कर थाम। दुल्हा तोरणद्वार में, जोडी सीता राम। भाव- भावना से भजो, हो जाओ भव पार। योग भोग सब छोड़ के, हृदय बसाए राम। कोरोना के कहर से, बेबस हुआं इंसान। आज प्...
शहादत
कविता

शहादत

डॉ. भगवान सहाय मीना जयपुर, (राजस्थान) ******************** भारत मां की आंखों से गंगा-जमुना बह निकली। महावीरों की सांसें जब काल विमान ने निगली। मातृभूमि के रखवालों को कैसे भारत भूलेगा, फटती है छाती धरती की बर्फ हिमालय पिघली। वीर क़फ़न तिरंगा ओढ़कर मां के आंचल सो गये, पाकर वीरों का सान्निध्य पुण्य हुईं धरती जंगली। शून्य हुईं पिता की आंखें बिलख रहे इनके बच्चे, मातृभूमि के सच्चे रक्षक छोड़ गए मां की अंगुली। हे बलिदानी वीरों व्यथित रहेगा ऋणी देश हमारा, हृदय से स्वीकार करें मेरे श्रद्धा सुमन भर अंजलि। जनरल बिपिन महान का दिया मधुलिका ने साथ, बरसों याद रहेगी शहादत यह केसरिया रंगीली। परिचय :- डॉ. भगवान सहाय मीना (वरिष्ठ अध्यापक राजस्थान सरकार) निवासी : बाड़ा पदम पुरा, जयपुर, राजस्थान घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौ...
विजय दशमी
कविता

विजय दशमी

डॉ. भगवान सहाय मीना जयपुर, (राजस्थान) ******************** मेरे लंका रूपी मन के, विषय विकारी रावण को। आप जीतने आना प्रभु, आश्विन शुक्ल दशमी को। अंधकार में दीप जलाने,सत्य विजय भव कहने को। शुद्ध चरित्र करने मेरा, मैं आहूत कर दशहरे को। लंका विजय की भांति, हरलो काम क्रोध मद लोभ को। मन है पापी कपटी वंचक, हे प्रभु दूर करों इस रोग को। धर्म पथ पर गमन करूं, नमन सीता के सम्मान को। मैं कलयुग का केवट करता, नित वंदन श्रीराम को। असत्य पर सत्य की जीत, प्रभु दोहरा दो इतिहास को। कलयुग कर दो त्रेता, अवध बना दो मेरे हिंदुस्तान को। घर-घर दीप जला दो, रावण भूल गए भगवान को। भारत को बधाई, वंदन अभिनंदन पावन त्योहार को। परिचय :- डॉ. भगवान सहाय मीना (वरिष्ठ अध्यापक राजस्थान सरकार) निवासी : बाड़ा पदम पुरा, जयपुर, राजस्थान घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षि...
भाग्य विधाता
कविता

भाग्य विधाता

डॉ. भगवान सहाय मीना जयपुर, (राजस्थान) ******************** बापू मेरे भारत भाग्य विधाता। थे वे सत्य अहिंसा पथ प्रदाता। पुतलीबाई कबा गांधी के प्यारे, साबरमती के संत स्वराज दाता। बने पहचान शांति दूत सत्याग्रही, राष्ट्रपिता इन्हें जन-जन पुकारता। हमें मिला आजादी का उजियारा, चलके बापू का चरखा सूत काता। यह गाते रघुपति राघव राजा राम, जोड़े जन हित अफ्रीका से नाता। जो खेड़ा चम्पारण से शुरू किया, बन गये हर आंदोलन के प्रणेता। अंग्रेजों भारत छोड़ो उद्घोष हुआ, किये गर्जना भारत के जन नेता। घर- घर बिगुल बजा आजादी का, परदेशी का यूं छूट पसीना जाता। मचा ब्रिटिश रानी के घर हड़कंप, अंतिम गौरों ने छोड़ी भारत माता। परिचय :- डॉ. भगवान सहाय मीना (वरिष्ठ अध्यापक राजस्थान सरकार) निवासी : बाड़ा पदम पुरा, जयपुर, राजस्थान घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिक...
गांव की मिट्टी
कविता

गांव की मिट्टी

डॉ. भगवान सहाय मीना जयपुर, (राजस्थान) ******************** गांव की मिट्टी पावन चंदन लगती है। लहलहाती फसलें शत्-शत् वंदन करती है। पीपल की शीतल छांव तले, झीने घूंघट में पनिहारी स्वागत करती है। रुनझुन घुंघरू बजते पग बैलों की जोड़ी, नाचे मोर पपिया कोयल गीत सुनाती है। खेतों में निपजे हीरे मोती, मीठी-मीठी खुशबू रोटी बाजरे की आती है। सूरजमुखी शर्मिली, नवयौवना सरसों, चंचल गैंहू की बाली झुक झुक नर्तन करती है। बालू के टीले नदी किनारे अन्नदाता की जननी, मेहनत कश गांव की मिट्टी अभिनंदन करती है। नन्हे गोपालक संग धेनु चलती खेतों में, कृषक बाला गुड्डियों का ब्याह रचाती है। घनीभूत भ्रमर का गुंजन खग कल्लोल करते, गांव की मिट्टी सब का आलिंगन कर लेती है। अनजान पथिक भी पाता यहां ठिकाना, ममता का सागर उमड़े प्रेम की गंगा बहती है। परिचय :- डॉ. भगवान सहाय मीना (वरिष्ठ अध्यापक राजस्थान...
मुहब्बत
कविता

मुहब्बत

डॉ. भगवान सहाय मीना जयपुर, (राजस्थान) ******************** आंखों में थी आरज़ू मुलाकात की। सागर जानता है बेबसी बरसात की। न सही मैं बनूं हमसफ़र आपका, क्यों हुई यूं बेदखली जज़्बात की। याद आपकी आई नदी बाढ़ सी, भूलने का तरीका बता ख्यालात की। लौट के सो गए परिंदे शाम के, मैयखाने से खबर नहीं रात की। सुना हूं दीवारों के कान होते हैं, करूं किससे चर्चें इस बात की। इतनी बेगैरत नहीं मुहब्बत हमारी, चांद से पूछ्ते है तारें औकात की। रिश्तों के अदब की नजीर रह गई, नहीं दुनिया देती दाद मेरी बिसात की। परिचय :- डॉ. भगवान सहाय मीना (वरिष्ठ अध्यापक राजस्थान सरकार) निवासी : बाड़ा पदम पुरा, जयपुर, राजस्थान घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है। आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि राष्ट्रीय हिन्दी ...
राम रहीम
कविता

राम रहीम

डॉ. भगवान सहाय मीना जयपुर, (राजस्थान) ******************** दिल को घर ख़ुदा का बना लो। इंसान हो इंसान को अपना लो। मंदिर- मस्ज़िद यूं ही रहने दो, अब गले इक दूजे को लगा लो। यह नफरत की खाई पाट दो, खड़ी रंजिश की दीवार गिरा लो। मुश्किलें जो आ रही सामने, दोनों मिल बैठकर सुलझा लो। भूल से उजड़ गए जो आसियाने, फिर गुलशन ए गुलिस्तां सजा लो। राम-रहीम कंधे से कंधा मिलाकर, इक सुन्दर हिंदुस्तान बना लो। बहने दो मोहब्बत की गंगा-यमुना, अपनी दोस्ती को परवान चढ़ा लो। परिचय :- डॉ. भगवान सहाय मीना (वरिष्ठ अध्यापक राजस्थान सरकार) निवासी : बाड़ा पदम पुरा, जयपुर, राजस्थान घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है। आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपने परिचय एवं छायाचित्...
शिक्षक/ सद्गुरु
कविता

शिक्षक/ सद्गुरु

डॉ. भगवान सहाय मीना जयपुर, (राजस्थान) ******************** ओजस्वी दीपक, युग दृष्टा होते है शिक्षक। नवचेतना, ज्ञान, वैभव के धारक होते है शिक्षक। वर्ण विधान, भाषा अलंकरण होते है शिक्षक। आत्मनिर्भर, स्वाध्याय के संबल होते है शिक्षक। ज्ञान उद्दीपक, अंत प्रेरणा के विश्लेषक होते है शिक्षक। हर युग के नायक, अद्भुत चित्रकार होते है शिक्षक। कर्तव्यनिष्ठा, सृजनशीलता के परिचायक होते है शिक्षक। कच्ची मिट्टी से महलों के सृजक होते है शिक्षक। खाद और जड़ विषय संम्प्रेषक होते हैं शिक्षक। अमूर्त भावी पीढ़ी के मूर्तिकार होते है शिक्षक। ज्ञान के आलोक से अज्ञान विनाशक होते है शिक्षक। वाष्प कण से मेघों के शिल्पकार होते है शिक्षक। मां का वात्सल्य, पिता का आशीर्वाद होते है शिक्षक। नेह का अहसान, बहन का आलिंगन होते है शिक्षक। वशिष्ठ, विश्वामित्र, चाणक्य, राधाकृष्णन होते है शिक्षक। द...
मौत
कविता

मौत

डॉ. भगवान सहाय मीना जयपुर, (राजस्थान) ******************** बैठे है कब से मेरे सिरहाने आस-पास वे भी, जिन्हें फुर्सत ना थी कभी मुझसे मुलाकात की। जिन्हें पसंद ना थी मेरी शक्ल फूटी आंख भी, अब दर्शन को भीड़ लगी है सारी कायनात की। जिनसे तोहफे में नसीब ना हुआ इक बोल भी, आज वे भी मुझ पर बरसा रहे फूल कचनार की। तरसे- रोये है मुश्किलों में हम एक कन्धे को, और अब बानगी देखिए जरा हजारों कन्धों की। कल दो कदम साथ चलने वाला ना था कोई, अब गणना असंभव है साथ चल रहे कारवां की। कमबख्त जिंदगी मौत से बदत्तर लगी आज, कितने रो रहे यहां कमी नहीं चाहने वालों की। परिचय :- डॉ. भगवान सहाय मीना (वरिष्ठ अध्यापक राजस्थान सरकार) निवासी : बाड़ा पदम पुरा, जयपुर, राजस्थान घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है। आप ...
जल
कविता

जल

डॉ. भगवान सहाय मीना जयपुर, (राजस्थान) ******************** प्राणों का आधार जल है। आज जल है तो कल है। जल नहीं तो कल नहीं, जब जीवन रक्षक जल है। पंच तत्त्व की काया को, परिपूर्ण करता जल है। सत्य बात आप पहचाने, प्रकृति का सृजक जल है। बिन पानी दुनिया न बनती, ईश्वर का वरदान जल है। कुएं बावड़ी सागर नदियां, इन सब का स्वरूप जल है। प्रकृति का मानक तत्त्व, फसलों का लहलहाना जल है। बिन पानी अन्न नहीं उपजे, वृक्ष पुष्प पर्ण कानन जल है। अमृत नीर जगत का सानी, पृथ्वी पर जीवन दानी जल है। सब इसे बचाने को करें जतन, जब अनमोल संपदा जल है। जल ही जीवन सत्य है, प्राकृतिक सौगात जल है। मत बहाओ मुझे बेकार, जल भी करता पुकार है। परिचय :- डॉ. भगवान सहाय मीना (वरिष्ठ अध्यापक राजस्थान सरकार) निवासी : बाड़ा पदम पुरा, जयपुर, राजस्थान घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिक...
पुलवामा के वीर सपूत
कविता

पुलवामा के वीर सपूत

डॉ. भगवान सहाय मीना जयपुर, (राजस्थान) ******************** पुलवामा के वीरों से, घात करें थे घाटी में। बैठे गोडसे दिल्ली में, जयचंद पावन माटी में। गीदड़ पहुंचे शेरों तक, छल कर तेरी गोदी में। हंसते-हंसते शहादत पाये, नगराज की चोटी में। गंगा-यमुना चीख उठी, सिंदूर मिली जब माटी में। भेंट चढ़ थी कितनी राखी, जन्नत तेरी छाती में। बेबस बूढ़ी आंखें छलकी, इन वीरों की यादों में। बिलख-बिलख मां रोई, उम्मीदे बिखरी लाशों में। नन्हीं-नन्हीं परियां चीखी, सपने मिल गये माटी में। हिंदुस्तानी धरती रोये, इन शेरों की शहादत में। कदम उठा लो अंतिम, गोली दागो दुश्मन में। अब मत खोजो मानवता, इन नरभक्षी गिर्द्धो में। परिचय :- डॉ. भगवान सहाय मीना (वरिष्ठ अध्यापक राजस्थान सरकार) निवासी : बाड़ा पदम पुरा, जयपुर, राजस्थान घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेर...
किसान
कविता

किसान

डॉ. भगवान सहाय मीना जयपुर, (राजस्थान) ******************** भूमि पुत्र के छालों से सजे हाथ देख लेते। कृषि बिल से पूर्व कूछ कृषक से पूछ लेते। जन्म मां ने दिया पोषण अन्नदाता ने किया, कुलिस कर्म उस हलधर को पहचान लेते। रोती जिसकी खुशियां सूदखोर की चौखट पर, सदियों से मौन सह रहा संताप उसे जान लेते। गरीबी, भूखमरी, कष्ट-कसक ही परिजन, वेदना अंतहीन श्रमरत हलवाह देख लेते। कंटकाकीर्ण पथ पर बेचता आशाओं को, तन हड्डियों की गठरी कृषिजीवी जान लेते। तलाश करता सुकुन धरा चीरकर जो, कर्म के रथ पर आरूढ़ हो आह! सह लेते। अच्छे दिन की आस में बनाकर सरकार तुम्हारी, महाजन की बही में अंगुठा गिरवी रख देते। श्रमसाधक चित्रकार जो सबकी जिंदगी का, अन्नदाता धरती का रखवाला पहचान लेते। परिचय :- डॉ. भगवान सहाय मीना (वरिष्ठ अध्यापक राजस्थान सरकार) निवासी : बाड़ा पदम पुरा, जयपुर, राजस्थान घोषणा पत...
बेटियां
कविता

बेटियां

डॉ. भगवान सहाय मीना जयपुर, (राजस्थान) ******************** मंदिर की आरती, मस्जिद की नमाज होती है बेटियां। जिंदगी का गान, दुनिया की आवाज होती है बेटियां। प्रकृति की नींव, मानवता की आधार होती है बेटियां। सभ्यता और संस्कृति की शुरुआत होती है बेटियां। आस्था की प्रतीक, हर धर्म की लाज होती है बेटियां। संसार सागर में, मानव नैया की पतवार होती है बेटियां। हृदय का भाव, बाबूल के सिर का ताज होती है बेटियां। भाई का अभिनंदन, मां की मुस्कान होती है बेटियां। सास की सौगात, ससूर की नाज होती है बेटियां। आंखों की चमक, चेहरे का नूर होती है बेटियां। रिश्तों के सागर में स्नेहिल पानी होती है बेटियां। हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई का त्योहार होती है बेटियां। चांद की चांदनी, सूरज की रोशनी होती है बेटियां। वात्सल्य का सागर, ममता की नदी होती है बेटियां। हाथों की रेखाएं, हर की तकदीर हो...
इक्कीसवीं सदी
कविता

इक्कीसवीं सदी

डॉ. भगवान सहाय मीना बाड़ा पदम पुरा, जयपुर, (राजस्थान) ******************** इक्कीसवीं सदी को लगा इक्कीसवां साल। आपको हृदय से मुबारक हो यह नया साल। अभिनंदन नववर्ष नव उमंग उम्मीद किरण, करूं अलविदा शत्-शत् नमन पुराने साल। यह काल याद रखेंगी मानव तेरी पीढ़ियां, चंद्रमा का कलंक सदी में यह बीसवां साल। घबराया महामानव प्रकृति चित्कार उठीं, जैसे- तैसे गुजर गया दानव कातिल साल। सदी में यम का जाल कोरोना काल, समय भी याद रखेगा यह बीसवां साल। आओ पधारों सुस्वागतम नूतन वर्ष, तुझे अंतिम सलाम अलविदा रुग्ण साल। हे प्रभु नववर्ष में हर जन खुशहाल रहे, प्रकृति भी संभलें भूलकर यह बीता साल। इक्कीसवीं सदी को लगा इक्कीसवां साल, आपको हृदय से मुबारक हो यह नया साल। परिचय :- डॉ. भगवान सहाय मीना (वरिष्ठ अध्यापक राजस्थान सरकार) निवासी : बाड़ा पदम पुरा, जयपुर, राजस्थान घोषणा पत...
मां
कविता

मां

डॉ. भगवान सहाय मीना बाड़ा पदम पुरा, जयपुर, (राजस्थान) ******************** मां की परिभाषा संसार। ममता ईश्वर का आकार। मां करती जीवन साकार। बिन तेरे यह जग बेकार। मां ईश्वर का अहसास, जन्नत होता मां का प्यार। मां..... मां बिन प्रभु भी लाचार। चुकता नहीं मां का उपकार। मां खुश होती है, जग में जीवन अपना वार। मां..... मां अनगिनत तेरे प्रकार। तूं ही दुनिया की सरकार। भिन्न नहीं ईश्वर से मां, बनता नहीं बिन मां संसार। मां..... संतान में मां होती संस्कार। मां ही जग की तारनहार। प्रकृति संवारने में होती, ईश्वर को मां की दरकार। मां की परिभाषा संसार। ममता ईश्वर का आकार। परिचय :- डॉ. भगवान सहाय मीना (वरिष्ठ अध्यापक राजस्थान सरकार) निवासी : बाड़ा पदम पुरा, जयपुर, राजस्थान घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौ...
हिंदी राष्ट्र धरोहर है
कविता

हिंदी राष्ट्र धरोहर है

डॉ. भगवान सहाय मीना बाड़ा पदम पुरा, जयपुर, (राजस्थान) ******************** हिंदी है वैज्ञानिक भाषा, भारत की पहचान है। लिपि इसकी देवनागरी, देवों की यह शान है। ब्रह्म गुप्त कुटिल से जन्मी नागर, सरल व्याकरण, इसका सुन्दर वर्ण विधान है अष्टम् अनुसूची में हिंदी राजभाषा, अक्षर-अक्षर करती भारत का गुणगान है। हिंदी भारत मां की सुन्दर बिंदी, हिन्द हिंदी हिन्दुस्तानी, भारत का अभिमान है। युगों-युगों से दुनिया की शिक्षा हिंदी, हिंदी रक्षक अपने देश का संविधान है। गागर में सागर भरती हिंदी, हिंदी राष्ट्र धरोहर है, विश्व में इसका मान है। कबीर पद मानस चौपाई हिंदी, हिंदी है देवों की भाषा पावन इसका धाम है। दुनिया में हिंदी का परचम लहराये, अजर अमर हो हिंदी, यह भारत की जान है। हिंदी सिखाती संस्कृति जगत को, विश्व सरगम भारत, हिंदी इसका गान है। परिचय :- डॉ. भगवान सहाय मीना (वरिष्ठ...
गुरु महिमा
दोहा

गुरु महिमा

डॉ. भगवान सहाय मीना बाड़ा पदम पुरा, जयपुर, (राजस्थान) ******************** गुरु ओजस्वी दीप है, नव चेतन हर ओर। अपने गौरव ज्ञान का, मनन करें हर छोर। गुरु वितान नव ज्ञान के, गुरु पावन परिवेश। हर युग के महानायक, आप मूर्ति अनिमेश। गुरुवर जागरूक हैं, गुरु करें नवाचार। आप गोविंद से बढ़े, बोलें सच विचार। गुरु भाषा का मर्म है, गुरु वाणी भंडार। आप अनुभूत सत्य है, गुरुवर सरल विचार। गुरु विशेष की खान है, गुरु कोमल अहसास। गुरु अज्ञान विनाशक है, गुरु नायक विश्वास। अभिनंदन गुरुदेव का, है सादर सत्कार। नव ज्ञान मिलें शिष्य को,करते नित उपकार। विद्यास्थली मंदिर है, गुरु मेरे भगवान। करता नित मैं वंदना, गुरुवर का सम्मान। गुरु संस्कृति की रोशनी, गुरु विशेषण विशाल। आप समान सगा नहीं, गुरु अनमोल मिशाल। नित गुरु शिष्य भला करें, जीवन रचनाकार। संस्कार की विशेषता, गुरु सफल सरक...
गणनायक गणराज
दोहा

गणनायक गणराज

डॉ. भगवान सहाय मीना बाड़ा पदम पुरा, जयपुर, (राजस्थान) ******************** एकदंत मूषक वाहन, गणनायक गणराज। गणपति वंदन आपको, सकल सुधारों काज। बुद्धि विधाता कृपाशर, गजानन महाराज। महागणपति लम्बोदर, गौरीसुत अधिराज। विघ्न विनाशक उमापुत्र, शुभ गुणकानन कविश। सिद्धि विनायक चतुर्भुज, भालचंद्र अवनीश। मंगलकरण क्षेमकरी, विघ्नहर विघ्नराज। प्रथम निमंत्रण नाथ को, पूरे करना काज। बाल गणपति महाकाय, बुद्धिनाथ गणराज। पहला वंदन आपको, विनायक विघ्नराज। विद्यावारिधि हेरम्ब, मंगलमूर्ति प्रमोद। वीरगणपति सिद्धिदाता, भीम भूपति सुबोध। रिद्ध-सिद्ध के दातार, नाव लगा दो पार। कृपा कर नाथ दीन पर, हो भवसागर पार। परिचय :- डॉ. भगवान सहाय मीना (वरिष्ठ अध्यापक राजस्थान सरकार) निवासी : बाड़ा पदम पुरा, जयपुर, राजस्थान घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना...
प्रेम
कविता

प्रेम

डॉ. भगवान सहाय मीना बाड़ा पदम पुरा, जयपुर, (राजस्थान) ******************** प्रेम पावन गंगा, प्रेम में शक्ति अपार। प्रेम उत्तंग हिमालय, प्रेम है उपहार। प्रेम वेद ऋचा, प्रेम अनन्त रसधार। प्रेम गीता ज्ञान, प्रेम सावन की बौछार। प्रेम मानस की चौपाई, प्रेम फागुन की बौछार। प्रेम समर्पण, प्रेम बंधन, प्रेम पैनी तलवार। प्रेम वात्सल्य, प्रेम भाग्य, प्रेम अनन्त उदगार। प्रेम भाव, प्रेम भाषा, प्रेम सकल संसार। प्रेम संस्कृति, प्रेम सभ्यता, प्रेम संस्कार। प्रेम मंदिर, प्रेम पूजा, प्रेम प्रकृति उपहार। प्रेम चंदा, प्रेम दिनकर, प्रेम आत्म वरदान। प्रेम नवरंग, प्रेम सौंदर्य, प्रेम पारावार। प्रेम मोक्ष दाता, प्रेम ईश साकार। प्रेम पावन गंगा, प्रेम में शक्ति अपार। परिचय :- डॉ. भगवान सहाय मीना (वरिष्ठ अध्यापक राजस्थान सरकार) निवासी : बाड़ा पदम पुरा, जयपुर, राजस्थान घोषणा पत्र : मैं यह ...
कृष्ण अष्टमी
कविता

कृष्ण अष्टमी

डॉ. भगवान सहाय मीना बाड़ा पदम पुरा, जयपुर, (राजस्थान) ******************** भाद्रपद कृष्ण अष्टमी, काली रात अंधियारी। कंस तेरी जेल में, जन्म लिएं बनवारी। वसुदेव गोकुल पहुंचे, संग ले कृष्ण मुरारी। कंस के कारागार पहुंची, यशोदा राज दुलारी। मामा तेरे अंत की, अब हो गई तैयारी। खुशियां छाई गोकुल में, मुस्काते नर नारी। देवकी के प्रसव की, खबर लें आये संचारी। क्रोधित हो नवजात को, मारने आया अत्याचारी। दुष्ट तुझे मारने, गोकुल आ गया गिरधारी। घबराया कंस, अपनी माया रची मुरलीधारी। गढ़ गोकुल की गोपियां, तुझे बोलें माधव मुरारी। ग्वाल बाल संग कान्हा, करता माखन चोरी। परिचय :- डॉ. भगवान सहाय मीना (वरिष्ठ अध्यापक राजस्थान सरकार) निवासी : बाड़ा पदम पुरा, जयपुर, राजस्थान घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है। आ...
कलाम
गीत

कलाम

डॉ. भगवान सहाय मीना बाड़ा पदम पुरा, जयपुर, (राजस्थान) ******************** हिन्दू के भगवान थे, मुस्लिम के रहमान थे। इक वो कलाम थे, भारत की पहचान थे। जीवन के पल-पल, क्षण-क्षण देश के नाम थे। हिन्दुस्तान की सेवा ही, बस उनके अरमान थे। इक वो कलाम थे, भारत की पहचान थे। पोकरण में कर धमाका, दुनिया को दिखलाये थे। अग्नि, पृथ्वी, नाग के जनक, वो भारत के लाल थे। इक वो कलाम थे, भारत की पहचान थे। एक हाथ में गीता, उनके एक हाथ कुरान थी। मज़हब की मिशाल, वे भारत के भगवान थे। इक वो कलाम थे, भारत की पहचान थे। था अजब नजारा, जब वे चिर निद्रा में सोये थे। हिन्दू या मुस्लिम ही नहीं, पूरे भारतवासी रोये थे। इक वो कलाम थे, भारत की पहचान थे। हिन्दू के भगवान थे, मुस्लिम के रहमान थे। इक वो कलाम थे, भारत की पहचान थे। परिचय :- डॉ. भगवान सहाय मीना (वरिष्ठ अध्यापक राजस्थान सरकार) निवासी : ब...
आंखें
कविता

आंखें

डॉ. भगवान सहाय मीना बाड़ा पदम पुरा, जयपुर, (राजस्थान) ******************** इंसान का हर राज़ बता देती है आंखें। सुख और दुःख का हाल बता देती है आंखें। लाख चुप रहें हम सब, ख़ामोश रहकर भी सब कह देती है आंखें। कुछ भी छिपाओं दुनिया से, दिल की हर बात बता देती है आंखें। दिल के रन्जों-गम,दिल की इश्क बयानी, सब से जगबीती कह देती है आंखें। यह दरिया जंग से गुजर गया होता, पर हर फजा में जीना सिखाती है आंखें।। परिचय :- डॉ. भगवान सहाय मीना (वरिष्ठ अध्यापक राजस्थान सरकार) निवासी : बाड़ा पदम पुरा, जयपुर, राजस्थान घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है। आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपने परिचय एवं छायाचित्र के साथ प्रकाशित करवा सकते हैं, राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अप...
हरियाली तीज
कविता

हरियाली तीज

डॉ. भगवान सहाय मीना बाड़ा पदम पुरा, जयपुर, (राजस्थान) ******************** साजन, सावन की सुरंगी आई बहार, कोयल बोले वाणी रस की। अब तो आ गया है तीज का त्योहार, आजाओं मेरी नहीं बस की। सूनी सेज तड़पती तेरे बिन, हे ! ननद के वीर। ससुराल का क्या सुख, मैं जाउंगी अपने पीहर। तेरे वादे झूठे, खिंचे पानी पर लकीर। यह बढ़ते ही जातें, जैसे द्रोपदी का चीर। परसों के दिन आ गये, मेरी सहेली के साजन। उदास हरियाली तीज, तेरे बिन सूना लगें सावन।। "हरियाली तीज" कविता राजस्थानी भाषा के महान कवि और मेरे परम आदरणीय श्रीमान भंवर जी "भंवर" की कविता "तीज रौ त्योहार" का मेरे द्वारा किया गया हिंदी अनुवाद है। परिचय :- डॉ. भगवान सहाय मीना (वरिष्ठ अध्यापक राजस्थान सरकार) निवासी : बाड़ा पदम पुरा, जयपुर, राजस्थान घोषणा पत्र : प्रमाणित किया जाता है कि रचना स्वरचित एवं मौलिक है। ...