२ जून की रोटी
डॉ. भगवान सहाय मीना
जयपुर, (राजस्थान)
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मैं बेच देता हूं
अपना ईमान,
अपना सत्य,
नैतिकता और खुद को भी...!!
मैं पशु, पक्षी, जानवर नहीं,
इंसान हूं, केवल इंसान !
दो जून की रोटी के खातिर ??
नीचता कि हद तक गिरकर...
मैं बेच देता हूं,
अपना अस्तित्व।।
परिचय :- डॉ. भगवान सहाय मीना (वरिष्ठ अध्यापक राजस्थान सरकार)
निवासी : बाड़ा पदम पुरा, जयपुर, राजस्थान
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।
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