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क्या करें कि …

सुशी सक्सेना
इंदौर (मध्यप्रदेश)
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सुना है हर दर्द मिट जाते हैं, मुस्कुराने से।
क्या करें कि…
आंसू आ ही जाते हैं, किसी न किसी बहाने से।

आँधियों का तो काम ही है चिरागों को बुझाना
क्या करें कि…
हम भी पीछे नहीं हटते चिरागों को जलाने से।

जो अपने हुआ करते हैं वो रूठा नहीं करते
क्या करें कि…
हर कोई अपना नहीं बनता लाख मनाने से

आंखों ने देख लिए हैं न जाने कितने समुंदर
क्या करें कि…
अब प्यास नहीं बुझती किसी भी मयखाने से

रात भर जागा किए हम जिसके दीदार के लिए
क्या करें कि…
ऐ साहिब,
उस चांद को बादलों ने छुपाकर रखा है जमाने से

परिचय :- सुशी सक्सेना
निवासी : इंदौर (मध्यप्रदेश)
इंदौर (मध्यप्रदेश) निवासी सुशी सक्सेना वर्तमान में, वेबसाइट द इंडियन आयरस और पोगोसो ऐप के लिए कंटेंट राइटर और ब्लॉग राइटर के रूप में काम करती हैं। आपकी कविताएं और लेख विभिन्न पत्रिकाओं और समाचार पत्रों में प्रकाशित हुए हैं। आपने कई संकलनों में भी योगदान दिया है एवं कई प्रशंसा पत्र और पुरस्कार प्राप्त किए हैं। विशेष रूप से, आपको अनुराग्यम द्वारा गोल्ड मेडल एवं वंदे मातरम पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। आपकी कई पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं।
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