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साधक परम कबीर

मीना भट्ट “सिद्धार्थ”
जबलपुर (मध्य प्रदेश)
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साधक परम कबीर ने, किया ईश का ध्यान।
भक्ति काल के सार में, उनका सृजन महान।।

पंचमेल भाषा लिखी,देकर शुद्ध विचार।
पृथक अंधविश्वास से,सदगुण सुध आधार।।

नदी बहा दी ज्ञान की, करते प्रेम प्रसार।
आडंबर से चिर पृथक, उत्तम भाव विचार।।

गुरुवर रामानंद से, दीक्षा मिली अपार।
साखी रचते प्रेम की, गाता है संसार।।

निराकार निर्गुण रहे, पाखंडों से दूर।
सच्चाई की सीख दी, गहन ज्ञान भरपूर।।

शब्द-तीर लेकर चले, जग में सतत कबीर।
भेद-भाव को रोकते, संग भाव गम्भीर।।

अनपढ़ थे ज्ञानी बड़े, अद्भुत सर्जक संत।
तत्व ज्ञान मर्मज्ञ थे, दास कबीर अनंत।।

हृदय भी गम्भीर हुआ, पाकर भाव सुधीर।
रचना दास कबीर की, व्यक्त करे जग पीर।।

लोक सुधारक थे बड़े,करते थे उद्धार।
दुर्लभ नैतिक ज्ञान दे,किया सहज उपकार।।

अनुपम थे सारे सृजन,वाणी थी अनमोल।
त्याग हृदय अभिमान को,बोले मीठे बोल।।

अक्खड़ दास कबीर थे ,फक्कड़ उर प्रतिमान।
सरल सहज आचार से, बदले कई विधान।।

परिचय :- मीना भट्ट “सिद्धार्थ”
निवासी : जबलपुर (मध्य प्रदेश)
पति : पुरुषोत्तम भट्ट
माता : स्व. सुमित्रा पाठक
पिता : स्व. हरि मोहन पाठक
पुत्र : सौरभ भट्ट
पुत्र वधू : डॉ. प्रीति भट्ट
पौत्री : निहिरा, नैनिका
सम्प्रति : सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश (मध्य प्रदेश), लोकायुक्त संभागीय सतर्कता समिति जबलपुर की भूतपूर्व चेयरपर्सन।
प्रकाशित पुस्तक : पंचतंत्र में नारी, काव्यमेध, आहुति, सवैया संग्रह, पंख पसारे पंछी
सम्मान : विक्रमशिला हिंदी विश्वविद्यालय द्वारा, विद्या सागर और साहित्य संगम संस्थान दिल्ली द्वारा, विद्या वाचस्पति की मानद उपाधि, गुंजन कला सदन द्वारा, महिला रत्न अलंकरण, राष्ट्रीय हिंदी रक्षक मंच इंदौर द्वारा “उत्कृष्ट न्यायसेवा अंतर्राष्ट्रीय सम्मान २०२४” से सम्मानित तथा कई अन्य साहित्यिक संस्थाओं से सम्मानित
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।


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