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कलम का शहीद

सूर्यपाल नामदेव “चंचल”
जयपुर (राजस्थान)
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वो शख्स शब्द बहुत
सुंदर लिखता था
तन नंगा था ढूंढने कपड़े
सड़को पर निकला था
लेखनी उसकी चलती तो
ज्वाला उगला करती थी
आग भूख से पेट में उसकी
सदा जला करती थी
शब्दों में उसके भावनाएं
बारिश की बूंदों सी बहती थी
आंखों से अश्रु की धारा
कहानी जुदा जुदा कहती थी
दुनिया की चकाचौंध के
अद्भुत सुख सदा लिखता था
बिन छत की कुटिया से
उन्मुख मुख लदा दिखता था
शहरों की सड़कों सी सर्पिल
कलम नहीं रुकती थी
घिसती हाथों की लकीरें
होनी में उसके भी चुभती थी
भूमिहर भी बरसातों में बो
बीज फसल उगाया करता था
कागज के खेतों में बो शब्दों को
अलख जगाया करता था
देश की खातिर सीमाओं पर
सैनिक जान दिया करता था
वो फकीर समाज में अपनी
स्याही से ज्ञान दिया भरता था
भूमि न बंदूक रही हाथों में
उसके शब्द प्रहार करता था
पाखंड आडम्बर से लड़कर
रिवाज सत्य प्रसार करता था
ज़माने के दस्तूर सदा शहीद
जवानों की गाथा गाते हैं
हुआ मौन है गुमनाम कहीं वो
कागज उसका नाम बताते हैं

परिचय :- सूर्यपाल नामदेव “चंचल”
शिक्षा : एम ए अर्थशास्त्र , एम बी ए ( रिटेल मैनेजमेंट)
व्यवसाय : उद्यमी, प्रबंधन सलाहकार, कवि, लेखक, वक्ता
निवासी : जयपुर (राजस्थान)
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरा यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है।

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