
संजय कुमार नेमा
भोपाल (मध्य प्रदेश)
********************
अरमानों की डोर से
सपनों की पतंग उड़ा लेता हूं।
मेरे सपनों की कई आकार,
प्रकार की पतंगे।
इनमें से अपनी हसरतों को
हवा में लहरा लेता हूं।
कभी-कभी अपनी मेहनत के
कन्ने बांधकर सपनों की
पतंग, उड़ा लेता हूं।
कभी अरमानों की
पतंग ऊपर उड़ती,
कभी गोते लगती,
कभी ढील पाकर,
नीचे आ जाती।
हार जीत खुशियों के आलम से,
आसमां में उड़ती पतंगो से,
एक ही संदेश पाता हूं।
हर पतंग उलझी है,
एक दूसरे की डोर से।
फिर भी कुछ रिश्ते उलझे से,
उड़कर भी खुशी से झूम रहे हैं।
एक डोरी से इन पतंगों से
दिल और नजरे,
एक दूसरे पर लगाये बैठे है।
आसमां में उड़ती पतंगों से,
हर दिल भी पतंग सा बंधा,
टक टकी लगाए बैठा है।
परिचय :- संजय कुमार नेमा
निवासी : भोपाल (मध्य प्रदेश)
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।
प्रिय मित्र, शुभचिंतक एवं परिवारजन आपको प्रेषित मेरी नई स्वरचित रचना, कृपया लिंक को टच कर रचना पढ़ें एवं कमेंट बॉक्स में अपने विचार रख कविता को लाइक करें …🙏🏻😊💐💐💐 राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपनी रचनाएँ
प्रकाशित करवाने हेतु अपनी कविताएं, कहानियां, लेख हिंदी में टाईप करके हमें hindirakshak17@gmail.com पर अणु डाक (मेल) कीजिये, अणु डाक करने के बाद हमे हमारे नंबर 98273 60360 पर सूचित अवश्य करें …🙏🏻 राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच का सदस्य बनने हेतु हमारे चलभाष क्रमांक 98273 60360 पर अपना नाम और कृपया मुझे जोड़ें लिखकर हमें भेजें…🙏🏻
