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Tag: संजय कुमार नेमा

सावन आया रे सखी
कविता

सावन आया रे सखी

संजय कुमार नेमा भोपाल (मध्य प्रदेश) ******************** देख सखी सावन आया रे, सावन की झड़ी संग, बूंद-बूंद मोती सजे। देख नजारा सावन खुद, महादेव को जल चढ़ाने आया। देख सखी बरसे सावन झूमके। बदरा भी ढोल बजाता आया। आराधना के तीज त्यौहारों से, चौमासा का मौसम आया। उमड़-घुमड़ घटा गरजे, बरसे सावन। नव-श्रंगार कर सखियां मिले, मन मोतियों से झूला सजाया। अमवा की डाली पर, उमंगों का झूला लहराया। खुशियों में सबका मन समाया। झरते झरने मन को रिझाया, कोयल ने भी गीत गुन गुनाया। पेड़ों की डाली झुक झुक जाए, हरियाली की बिछी चादर, धरा भी घूंघट उड़ाये। भीगे तन-मन, देख री सखी बरसे सावन। दिल झूम-झूम जाए, सावन आया रे सखी, सावन की घटाएं। बदरा भी ढोल बजाये। परिचय :- संजय कुमार नेमा निवासी : भोपाल (मध्य प्रदेश) घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्...
कंकर में शंकर
कविता

कंकर में शंकर

संजय कुमार नेमा भोपाल (मध्य प्रदेश) ******************** कंकर-कंकर में बसे, मां नर्मदा के शंकर। भक्तों के हृदयों में बसे, भोले डमरू वाले। शिव ही, सत्य अविनाशी। नर्मदा के हर कंकर बोले "ॐ नमः शिवाय" कंकर-कंकर में शिव का दर्शन। डमरू की धुन सुन, दुनिया सारी झूमे। भोले बाबा तेरी, लीला महिमा न्यारी। कंकर-कंकर में शंकर, श्रद्धा से सुमन चढ़ाते। ऊं नमः शिवाय कर भोले के गुणगान गाते। जो भी शरण में आते। बेड़ा पार लगाते। कंकर-कंकर में शंकर, मां नर्मदा के कंकर पूज्यनीय शंकर। परिचय :- संजय कुमार नेमा निवासी : भोपाल (मध्य प्रदेश) घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है। कृपया लिंक को टच कर रचना पढ़ें एवं कमेंट बॉक्स में अपने विचार रख कविता को लाइक करें ...🙏🏻😊💐💐💐 राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपनी रचनाएँ प्रकाशित करव...
भीगी-भीगी धरती पर
कविता

भीगी-भीगी धरती पर

संजय कुमार नेमा भोपाल (मध्य प्रदेश) ******************** भीगी-भीगी धरती पर, पैरों के निशान बनाते हैं। बारिश की बूंदों संग, बचपन याद करते हैं। मन को भिगो कर गुन गुनाते हैं। जमीन के आँचल में जब बादल उतरे। सारे घाव धरा के भर जाते। मिट्टी की सोंधी खुशबू, साँसों में उतर जाती। मोती सी बूंदें गिरें, बदरा भी ढोल बजाये। झरते झरने मन को कितना रिझाये। नव-श्रंगार कर धरा ने उपवन सजाया। लताओं ने उमंगों का झूला लहराया। उमड़ घुमड़ बरसे बादल, बारिश की घटाएं। झूमते पेड़ों की डालें भी झुक-झुक जायें। भीगी-भीगी धरती पर हरियाली की चादर से, धरा को घूंघट उड़ायें। यह बारिश की घटाएं, देखे मेरा मयूर मन। बादलों की स्याही से कलम भिगोता। मेरा हर भाव नया सृजन हो जाता। परिचय :- संजय कुमार नेमा निवासी : भोपाल (मध्य प्रदेश) घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक...
लम्हा-लम्हा चुराना पड़ता है
कविता

लम्हा-लम्हा चुराना पड़ता है

संजय कुमार नेमा भोपाल (मध्य प्रदेश) ******************** जीवन कोई आसान सफर नहीं, काँटों पर चलकर मंजिलों को छूना पड़ता है। गिरते हैं, संभलते हैं, फिर बढ़कर, मेहनत से तकदीर बनती है। उम्मीद का दिया कभी बिना बुझे, अँधेरे में भी रौशनी बनकर, खुद चमकना पड़ता है। समय कभी साथ दे, कभी परीक्षा ले, किस्मत साथ ना दे। शिद्दत से जो जुड़कर, कभी न हारा, हर लम्हा एक लड़ाई है, हर साँस एक कहानी है। जो समय चुराकर मेहनत कर ले, उसी के नाम तारीखें और जवानी है। मंजिल पूछती है मेहनत का हिसाब, और सपने माँगते हैं वक्त की कुर्बानी। जो आज पसीना बहा दे मेहनत में, कल दुनिया उसी की जुबानी को गले लगाता है। परिचय :- संजय कुमार नेमा निवासी : भोपाल (मध्य प्रदेश) घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है। कृपया लिंक को टच कर रचन...
मां तो मां होती है
कविता

मां तो मां होती है

संजय कुमार नेमा भोपाल (मध्य प्रदेश) ******************** आंचल के छांव में, ममता के मोह में, मां तो सब सह जाती है। मां तो मां ही होती है।। स्नेह भाव, मम्मत्व से भरी। पुत्र प्रेम में सब भूल सारे कष्ट सहकर भी हंसकर जीती जाती है। बिटिया से करे हंसी ठिठोली, आंखों ही आंखों में सब कुछ समझाती। मां तो मां ही होती है।। पाल पोस कर किया बड़ा अब फिर भी सीने से लगाती है। सपने देखे बहुओं का, दामाद ढूंढे भविष्य के सपने बुने, घर को स्वर्ग बनाती है। घर संभाले, बच्चों की इच्छा पूरी करें, लाड़ लुटाए लड़के पर इतनी इतराती है। मां तो मां होती है।। सब कुछ सह कर भी जीवन नौछावर कर जाती है। ‌मिला न कोई अपना सा, अब तो मां की यादों में रहता हूं, सपनों में जीता हूं, अकेले में ही मां से बातें करता हूं ‌।‌ मां तो मां होती है।। परिचय :- संजय कुमार नेमा निवासी : भोपाल (मध्य प...
अरमानों की पतंगे
कविता

अरमानों की पतंगे

संजय कुमार नेमा भोपाल (मध्य प्रदेश) ******************** अरमानों की डोर से सपनों की पतंग उड़ा लेता हूं। मेरे सपनों की कई आकार, प्रकार की पतंगे। इनमें से अपनी हसरतों को हवा में लहरा लेता हूं। कभी-कभी अपनी मेहनत के कन्ने बांधकर सपनों की पतंग, उड़ा लेता हूं। कभी अरमानों की पतंग ऊपर उड़ती, कभी गोते लगती, कभी ढील पाकर, नीचे आ जाती। हार जीत खुशियों के आलम से, आसमां में उड़ती पतंगो से, एक ही संदेश पाता हूं। हर पतंग उलझी है, एक दूसरे की डोर से। फिर भी कुछ रिश्ते उलझे से, उड़कर भी खुशी से झूम रहे हैं। एक डोरी से इन पतंगों से दिल और नजरे, एक दूसरे पर लगाये बैठे है। आसमां में उड़ती पतंगों से, हर दिल भी पतंग सा बंधा, टक टकी लगाए बैठा है। परिचय :- संजय कुमार नेमा निवासी : भोपाल (मध्य प्रदेश) घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्व...
संस्कृत है हिंदी की जननी
कविता

संस्कृत है हिंदी की जननी

संजय कुमार नेमा भोपाल (मध्य प्रदेश) ******************** संस्कृत है हिंदी की जननी यही भारत माता की पहचान। विश्व भौतिकवाद से परे हमारी हिंदी। कई सुरों से निकाल कर, जन-जन के अंतर मन का भाव है हमारी हिंदी। भारत माता के इस भाव का तिलक करें, इसका सम्मान करें। तुलसीदास, सूरदास कई ऋषि मुनियों की लेखनी हमारी हिंदी। अंतर मन के भाव जागृत कर सारे जग को ज्ञान हमारी भाषा देती। हृदय से मिलाकर एक रखती, पर चिंता यही अंग्रेजी भाषा अब खंड-खंड कर चीर हरण कर रही। करें प्रतिज्ञा हर दिन हर पल हिन्दी दिवस मनाकर, अपनी भाषा का सम्मान बढ़ाना है। परिचय :- संजय कुमार नेमा निवासी : भोपाल (मध्य प्रदेश) घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है। प्रिय मित्र, शुभचिंतक एवं परिवारजन आपको प्रेषित मेरी नई स्वरचित रचना, कृपया...
गणित दिवस
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गणित दिवस

संजय कुमार नेमा भोपाल (मध्य प्रदेश) ******************** गणित दिवस पर जिंदगी भर का गणित लगाया। क्या खोया क्या पाया, इसका हिसाब लगाया। जब पाया में से खोया को घटाया हासिल का शुन्य आया। सोचा कर्म तो इतने करे, फिर भी जीरो क्यों आया। कर्मों में से अपनी जिंदगी की मेहनत का जोड़ लगाया १०० में से ९९ नंबरों को पाया। एक नंबर को ढूंढने में सभी कर्मों का लेखा जोखा पाया। आखिर में यही पाया जीवन एक जिम्मेदारी। जोड़ लगा कर जिंदगी जीरो ही पाओगे। कर्मों का फल ईश्वर के हाथों अंत में ही पाओगे। परिचय :- संजय कुमार नेमा निवासी : भोपाल (मध्य प्रदेश) घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है। प्रिय मित्र, शुभचिंतक एवं परिवारजन आप सभी को नववर्ष पर हार्दिक शुभकामनाएँ। आशा है इस अवसर पर आप को प्रेषित मेरी नई स्वरच...
बिदाई की वेला आई
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बिदाई की वेला आई

संजय कुमार नेमा भोपाल (मध्य प्रदेश) ******************** हम सब विचार करें केलेंडर वर्ष २०२५ बिदाई की वेला आई। उम्र की डोर से रोज एक मोती झड़ रहा है.... तारीख़ों के जीने से यह हमारी नियति है। २०२५ में कई सुखद यादें जुड़ी। नये साल के साथ अब सुखद यादें जुड़ी रहें। उम्र का पंछी नित दूर, और दूर निकल रहा है.. नया साल में अब वक्त का इंतजार है - गुनगुनी धूप और ठिठुरती रातें जाड़ों की... गुज़रे लम्हों पर.. झीना-झीना सा इक पर्दा गिर रहा है.. अब ज़िन्दगी का नया दौर गुज़र रहा है... इंतजार है नये वर्ष में नये स्वप्ननों का नये अनुभवों का। आप सभी को आने वाले केलेंडर नये "वर्ष 2026 का" हर दिन शुभ मंगलमय हो। आप सभी का अभिनंदन है, वंदन है नये वर्ष में। ईश्वर से प्रार्थना आपके सभी मनोरथ पूर्ण हो, आप सभी सपरिवार स्वस्थ एवं खुश रहें... इन्हीं शुभकामनाएं सहित ... परिचय :- स...
विश्व गुरु मोदी जी
कविता

विश्व गुरु मोदी जी

संजय कुमार नेमा भोपाल (मध्य प्रदेश) ******************** मोदी जी का जय घोष हो सनातन संस्कृति को बचाने, कलयुग से सतयुग लाने, मोदीजी को सिंघासन पर बैठाया। संकल्प लिया था जिसने मां भारती को सोने की चिड़िया बनवाया। किसानों का आत्म सम्मान बचाने। नये उद्योगों से भारत का डंका बजवाया। गांधी का गया जमाना, एक गाल में चांटा पढ़े तो, दूसरा मत दिखाना। अब है मोदीजी का २१ वीं शताब्दी का जमाना। कोई मारे तो उसे ब्रह्मोस सुखोई विमान दिखाना। खून का बदला ऑपरेशन सिंदूर दिखाना। मोदीजी अब ट्रंप की भाषा को आंखों से ही समझाते। धर्म युद्ध की रणभेरी में मेकइन इंडिया का मंत्र समझाते। किसानों और उद्योगों को खुशहाली देते। मोदी जी के स्वाभिमान के खातिर तुम भारत माता को हर पल अपने दिल में रख लेना। भारत माता के प्रधानमंत्री मोदी जी की जयघोष हो। परिचय :- संजय कुमार नेमा निवासी : भोप...
मां तुम्हे प्रणाम
कविता

मां तुम्हे प्रणाम

संजय कुमार नेमा भोपाल (मध्य प्रदेश) ******************** मां सारे पुण्यों का परिणाम हो तुम। जीवन दिया इस संसार में। जब आया तो मेरे कोरे मन पर, पहला नाम हो तुम। तुम्हारी, ममता त्याग, तपस्या, कर्तव्यनिष्ठा का परिणाम हें हम। हमेशा रहती यादों में अब भी, भूलीं बिसरी स्मृतियों में। छोड़ दिया हमारा साथ जल्दी ही, अब यादें बाकी है‌। सब-कुछ पाकर भी, अब दिल का कोना खाली है। बीते दिनों की यादें कर, अब भी आंखें नम हो जाती है। जन्म जयंती पर भावपूर्ण श्रद्धांजलि सादर चरण स्पर्श नमन ... परिचय :- संजय कुमार नेमा निवासी : भोपाल (मध्य प्रदेश) घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है। आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपने परिचय एवं छायाचित्र के साथ प्रकाशित करवा सकते हैं, राष्ट्र...
नील गगन में विजयी तिरंगा
कविता

नील गगन में विजयी तिरंगा

संजय कुमार नेमा भोपाल (मध्य प्रदेश) ******************** नील गगन में विजयी तिरंगा, उन्मुक्त लहराता रहे। वसुंधरा पर हो रहे शत्रु प्रबल। मां भारती तुम्हें पुकारती, बढ़े चलो अपने लहू से, विजय तिलक करे चलो। कहती मां भारती बिना डरे, गोलियों से उतार दो इनकी आरती। भारत माता की जयकार करो, शत्रु सिरों का संहार करो। तिरंगे का परचम फहरायेजा। शूरवीर गुरु गोविंद,वीर शिवाजी राजपुताना की लाज बढ़ायेजा। हाथों में तिरंगा शान से लहरायेजा। नील गगन में विजयी तिरंगा, विश्व गुरु बनकर उन्मुक्त फहराता रहे। मेरे वतन के सीने पर हमेशा, तिरंगा लहराता रहे। जन्मों तक वतन हो हिंदुस्तान, हाथों में तिरंगा शान से लहराता रहे। जय हिंद जय मां भारती।। भारत माता की जय, वंदे मातरम। परिचय :- संजय कुमार नेमा निवासी : भोपाल (मध्य प्रदेश) घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार ...
जब नेह घुला हो बातों में
कविता

जब नेह घुला हो बातों में

संजय कुमार नेमा भोपाल (मध्य प्रदेश) ******************** इत्र नहीं मिलता जग में, दोस्ती को महकाने का। जब नेह घुला हो बातों में, व्यवहार महकने लगता है। हो प्रीत परस्पर रिश्तों में, घर द्वार महकने लगता है। जब मित्र परिवारों से जुड़े तो, किरदार महकने लगता है। मित्रता दिवस पर हार्दिक शुभकामनाएं स्वीकारें 🙏 परिचय :- संजय कुमार नेमा निवासी : भोपाल (मध्य प्रदेश) घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है। आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपने परिचय एवं छायाचित्र के साथ प्रकाशित करवा सकते हैं, राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि प्रकाशित करवाने हेतु अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, हिंदी में टाईप करके हमें hindirakshak17@gmail.com पर अणु डाक (मेल) कीजिय...
सावन
कविता

सावन

संजय कुमार नेमा भोपाल (मध्य प्रदेश) ******************** आया सावन झूम के। सावन की झड़ी संग, बूंद-बूंद से मोती सजे। देख नज़ारा सावन भी खुद, महादेव को जल चढ़ाने आया। बदरा ने भी ढोल बजाया। आराधना के तीज त्यौहारों में, महादेव भी चौमासे के त्योहार लाये। झरते झरने मन को कितना रिसायें। बरसे सावन की घटाएं, मन को रिझायें। नव-श्रंगार कर, सखियां मिले। मिलकर मन मोतियों से झूला सजायें। खुशियों मे सबका मन समाये। उमंगों का झूला लहरायें। उमड़ घुमण बरसे सावन, बदरा ने भी ढोल बजाये। झरते-झरने मन को रिझाये, झूम के बरसे सावन की घटाएं। पेड़ो की डाले भी झुक झुक जायें।। हरियाली की बिछा चादर धरा को घूंघट उड़ायें। नाचे मेरा मयूर मन। सावन की घटाएं मन को इतना रिझायें। झूमके बरसे सावन की घटायें। परिचय :- संजय कुमार नेमा निवासी : भोपाल (मध्य प्रदेश) घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता...
महाकुंभ प्रयागराज
कविता

महाकुंभ प्रयागराज

संजय कुमार नेमा भोपाल (मध्य प्रदेश) ******************** महाकुम्भ का यह संगम, अजब गजब अध्यात्म आस्था असीमित निर्मल, पवित्र, मोक्षदायिनी, सरिता त्रिवेणी के संगम में महाकुंभ का जयघोष है। निर्मल जल, शिव जटाओं से अवतरित। मां गंगा के दर्शन से निर्मल हो गया मन। मां पतित पावनी के जल से कंचन हो गया तन। पुण्य सरिता प्रवाहिनी जीवन की आधार हो तुम। अंत समय के बाद भी तुम मोक्षदायनी तारणहार तुम। प्रयागराज की पुण्य धरा पर अविरल जल धारा। मां गंगा का प्रवाहित जल पुण्य सरिता। प्रकृति की अनमोल धरोहर को यह मानव सभ्यता, भेंट सदा समझे हम। महाकुंभ में करोड़ों श्रद्धालुओं का स्नान, तर्पण ही जीवन की आस्था हो तुम। हमको इस महत्व को सदैव समझना होगा। कहीं इसका दुरूपयोग ना होने पाए। तब ही जल संरक्षण से निर्मल जल में, सभ्यता मोक्षदायनी की आस्था में सदा डुबकी लगायेगी। आगे ह...
धर्मयुद्ध
कविता

धर्मयुद्ध

संजय कुमार नेमा भोपाल (मध्य प्रदेश) ******************** धर्मयुद्ध के महासंग्राम में सत्य सदा अजेय रहा। रणभेरी बजेगी, अब धर्म युद्ध का घोष करो। खुद को तुम निर्दोष करो। जो धर्म के साथ खड़ा रहा वह योद्धा रहा। रण में अब कूद पड़ो। शंखनाद करो, तुम प्राचीरों से धर्म युद्ध अविलंब करो। कौन कहता है, महाभारत का युद्ध था। वह तो सिर्फ धर्मयुद्ध का जयघोष रहा। धर्म युद्ध अब सज रहा, सारथी मार्ग प्रशस्त करो। कारण जो भी हो, सच के साथ कृष्ण सदा खड़ा रहा। इतिहास कहता है, धर्म युद्ध में सत्य का प्रहार रहा। चाहे विजय मिले या हर मिले, सत्य कर्म का युद्ध रहे। चाहे वीरगति मिले या विजय मिले, धर्म रक्षा के लिए तू अब क्यों बैठा है। धर्म के साथ जो न रहा, वह धर्म युद्ध के विरुद्ध रहा। परिचय :- संजय कुमार नेमा निवासी : भोपाल (मध्य प्रदेश) घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्व...
माँ
कविता

माँ

संजय कुमार नेमा भोपाल (मध्य प्रदेश) ******************** मां सारे पुण्यों का परिणाम हो तुम, इस संसार में आया जब मेरे कोरे मन पर, लिखा पहला नाम हो तुम। स्मृति में तुम्हारी भूली बिसरी आती हैं यादें। यादों से आंखें नम हो जाती है। आपकी त्याग, तपस्या, कर्तव्य निष्ठा, स्नेह की तस्वीर, नजर आती है। सब-कुछ पा कर भी तुम्हारी, कमी रह जाती है। बीते तुम्हारे दिनों की, सदा याद आती है। परिचय :- संजय कुमार नेमा निवासी : भोपाल (मध्य प्रदेश) घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है। आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपने परिचय एवं छायाचित्र के साथ प्रकाशित करवा सकते हैं, राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि प्रकाशित करवाने हेतु अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, हिंदी में ...
भक्त और भगवान
स्तुति

भक्त और भगवान

संजय कुमार नेमा भोपाल (मध्य प्रदेश) ******************** प्रभात वंदना में विनती, अरज सुन लो श्याम जी। भक्त और भगवान की लड़ाई है, अब तुझे सुनना ही पड़ेगा। भक्त की अरज सुन लो, श्याम जी यशोदा मैया के दरबार में, हाजिरी लगाउंगा। भक्त और भगवान की लड़ाई है श्याम जी, यशोदा के दरबार में हार जाओगे। भक्त और भगवान की लड़ाई है तुम्हें सुनना ही पड़ेगा। न सुनोगे तो श्याम जी जन्मो तक लड़ता जाऊंगा। भक्त की अपील सुन लो वरना राधा रानी से अर्जी लगाउंगा । जारी होगा तुम्हें सम्मन भक्त की विनती को सुनना पड़ेगा । भक्त की अरज सुन लो श्यामजी, यशोदा के दरबार में आना पड़ेगा। श्याम जी यशोदा के दरबार में ऐसी दलील दूंगा, भक्त की लड़ाई है, अब तो श्याम जी हार जाओगे। यशोदा के दरबार में रूक्मिणी जी से ऐसी अपील करवाउंगा, भक्त के पक्ष में होंगे सारे फैसले, मेरे श्यामजी। अब तो श...
मेरी कल्पना से
भजन

मेरी कल्पना से

संजय कुमार नेमा भोपाल (मध्य प्रदेश) ******************** मेरी कल्पना से, प्रभु तुम्हारी, छवि बनाता रहूं। प्रभात वंदना में तुम्हारे दर्शनों को करता रहूं। सुमिरन कर चिंताओं को, प्रभु चरणों में रखता। प्रभु भक्ति में तुम्हारी नित, नई छवि बनाता। कल्पनाओं में डूबा, नए-नए विचारों को रखता। भक्ति से अपनी अरज को लगाता। तेरी कल्पनाओं में प्रभु दर्शन को पाता। कभी छलिया तो भोले भंडारी कहता। इसी बहाने कल्पनाओं में प्रभु दर्शन करता। प्रभु दर्शन में नित नित सुंदर छवि बनाता। मांगू यही, मेरी कल्पनाओं में दर्शन देते रहना। प्रभु कृपा बनाए रखना। दिल मैं छवि बनाए रखना। परिचय :- संजय कुमार नेमा निवासी : भोपाल (मध्य प्रदेश) घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है। आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि राष्ट्रीय हिन्...
प्रभात वंदना
स्तुति

प्रभात वंदना

संजय कुमार नेमा भोपाल (मध्य प्रदेश) ******************** मेरे प्यारे कृष्ण कन्हैया, अब तो बसो स्मृतियों में। भक्ति मैं डूबा प्रभु, श्री चरणों में रचे बसाये रखना। स्मृतियों की नैया में, भवसागर से पार लगा देना। प्रभात वंदना में, अब कृष्ण कन्हैया आए। प्रभु के अलौकिक दर्शन पाए, मन को कितने हर्षाये। स्मृतियों में डूबा बैठा कुंज-गली में, प्रभु के सुंदर दर्शन पाए। प्रभात वंदना मैं मांगू वर, प्रभु चरणों में जीवन रमता जाए। जीवन उपवन में बजती रहे, स्मृतियों की मधुर मुरलिया। खिलें पुष्प बगिया में, खुश्बू बिखेरें स्मृतियों में। प्रभु स्मृति भाव बनाये रखना। श्री चरणों में बसाये रखना। परिचय :- संजय कुमार नेमा निवासी : भोपाल (मध्य प्रदेश) घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है। आप भी अपनी कविताएं, कहानिय...
पनिहारिन
कविता

पनिहारिन

संजय कुमार नेमा भोपाल (मध्य प्रदेश) ******************** दिखती नहीं कोई पनिहारिन लंबी-लंबी पगडंडी सूनी है। ना पनघट बचे ना पानी है। ना चमचमाती घघरी है। गोरी पनिहारिन अब दिखती नहीं । सिर पर सजी चुनरी, दिखती नहीं। कमरिया पर गघरी दिखती नहीं। हिरनी सी चाल में दिखती नहीं। पग पैजनिया से घुंघरू बजते नहीं। तीखी कजरारी आंखें चमकती नहीं। केशों में लिपटा गजरा दिखता नहीं । गजरों की भीनी खुशबू आती नहीं। अब न पनघट बचे ना पनिहारिन है। पैजनिया से घुंघरू बजते नहीं। पनघट वाली तिरछी गली गुलजार न रही। सूना कोना अब मुलाकातें, यादें रही। हिरनी की चाल सा न कोई दिखाता। तिरछे नैनो में काला कजरा, न दिखता। तिरछे नैनो से पनिहारिन को कौन बुलाता। पपीहा भी पियू कर शांत हो जाता । कोयल भी कुहू कुहू कर उड़ जाती है । पनघट पर चाहूं ओर घोर उदासी है। गांवों की यादें अब भी बाकी है। पनिहारिन भी अब उदास...
वसंत की बहार
कविता

वसंत की बहार

संजय कुमार नेमा भोपाल (मध्य प्रदेश) ******************** वसंत की बहार, रंगो की फुहार, गुलाल की वर्षा खुशियों की बौछार। चंदन की खुशबू , अपनों का प्यार होली का त्योहार। होली के रंगों में रंगे हम। खुशियों का त्योहार है, अपनत्व पन के गीतों से रिश्तौं में, घुल जाये प्यार का गुलाल। चारों और गुलाल उड़े, कभी प्रेम का रंग न छूटे। दिलों से मिलने का त्योहार आया। सदा खुश रहें अपनों के संग। प्यार के रंग से भरो पिचकारी। रंग न जाने जात पात की होली। हर गालों में गुलाल लगे गुजिया पकवानों संग थाल सजे। गली-गली भांग घुटे अपनों का प्यार देख, चांद से चांदनी बोली, खुशियों से भरी रहे सबकी होली। दिलों को मिलाकर गले से लगाकर बसंत की बयार चले अपनों के प्यार को प्यार से रंग दो यही है होली। दूरियां, नाराजगी मिटाने की यही है होली। परिचय :- संजय कुमार नेमा निवासी : भोपाल (मध्...
शब्दांजलि
कविता

शब्दांजलि

संजय कुमार नेमा भोपाल (मध्य प्रदेश) ******************** मां तुम्हारा मुस्कुराता चेहरा तस्वीर में ही रहा। तस्वीर में छलकते चेहरे को निहारता।। अब अपने मन को समझाता। तस्वीर की झूलती माला को असहाय से देखता ।। भूली बिसरी यादों को अपनी यादों से जोड़ता। मां के आशीषों एवं आंचल को खोजता।। यादों में खोकर बीते कल को खोजता। अब तुम्हारी यादों में आंसुओं को बहाता।। अपनी नई-नई बातों को तुमसे जोड़ता। बीते कल को तुमसे जोड़ता।। अब तुम्हारे बिना अपनी ख्वाहिश किसको बताऊं। अपनी मुश्किलों और दुख किसको सुनवाऊं।। मां तुम्हारे बिना अपना वजूद बचा ना सका। अब अपनी जिद्द किसी से पूरी करवा न सका।। अपने नए नए सपने, खुशियां किसी को बतला ना सका।। अब मुझे घर में गले से लगाने वाला ना रहा। मेरी आवाज को सुनने वाला कोई ना रहा।। अपनी सफलता का जश्न मनाने वाला, कोई ना रहा। अब तुम्हारा मुस्क...
ये सांसें अनमोल हैं
कविता

ये सांसें अनमोल हैं

संजय कुमार नेमा भोपाल (मध्य प्रदेश) ******************** ये सांसें बहुत अनमोल हैं देह के भीतर जाती है बहुत पीड़ा पाती है। पीड़ा पाकर ही यह आतीं हैं। जब सांसे अहंकार से मुलाकात कर बैठी तो जीवन में दुःख ही पाती है। ये सांसें गिनती की मिली हैं ये सांसें अनमोल हैं। इस धरा पर आयें हैं इसका ध्यान रखना है। एक-एक सांस का हिसाब रखना है। इससे पहले देह का इनसे नाता छूटे, इन सांसों का हिसाब रखना है। ये सांसें अनमोल हैं। परिचय :- संजय कुमार नेमा निवासी : भोपाल (मध्य प्रदेश) घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है। आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपने परिचय एवं छायाचित्र के साथ प्रकाशित करवा सकते हैं, राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि प्रकाशित करवाने हेतु अ...
नौं दिन माता रानी के
भजन, स्तुति

नौं दिन माता रानी के

संजय कुमार नेमा भोपाल (मध्य प्रदेश) ******************** नवरात्र का त्योहार मां की शक्ति और भक्ति का आया। सब मिल करें नौं दिन माता रानी के, विविध स्वरूपों की आराधना एवं साधना। प्रथम दिवस होती पर्वतराज शैलपुत्री की आराधना। द्वितीय दिवस आती, देवी ब्रह्मचारिणी अपने स्वरूप का दर्शन देने।। जप की माला एवं कमंडल लेकर। तीसरा दिवस आता देवी चंद्रघंटा स्वरूप का, वाहन है इनका शेर। असुरों के सहार के लिए।। हाथों में सजते सभी अस्त्र-शस्त्र। चौथा दिवस करते पूजा माता के कुष्मांडा स्वरूप के। इनके स्वरूप में समाया पूरा ब्रह्मांड का तेज, अपने स्वरूप में ही पायी तेजस्वी जगत आभा की। पांचवा दिवस आता आराधना का देवी के स्कंदमाता स्वरूप का।। माता दर्शन देती ममत्त्व का,‌ बैठी गोद में लेकर बालक रूप भगवान स्कंद का। छठवां दिन आराधना का आया माता दर्शन देती कात्यायनी रुप में।...