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स्त्री की आवाज

शिवदत्त डोंगरे
पुनासा जिला खंडवा (मध्य प्रदेश)
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तुम पुकारे जा रहे हो
और मुझसे पूछते हो
कि अजनबी सी ख्वाहिशें
क्यों पाल बैठी हूँ?

मैं उसी आदमी से
चाहत कर बैठी हूँ
जो अपने ही शोर में
खुद को खो चुका है।

न तुम इत्मिनान से
बैठ पाते हो,
न नींद तुम्हें पूरा
अपना मानती है
और फिर भी
पूछते हो मुझसे
कि इस मुख़्तसर सी
ज़िंदगी से
मैं क्या चाहती हूँ?

मैं तो बस इतना
चाहती थी
कि तुम थक कर
किसी शाम मेरे
पास बैठ सको,
बिना कुछ
साबित किए,
बिना खुद से लड़े।

पर तुम तो
अपनी तन्हाई की
शाम का भी
चराग़ नहीं जला पाए…
और अब मुझसे
पूछते हो
कि मैं हवा जैसी
चाहत क्यों
लेकर आई हूँ?

शायद मेरी गलती
यही थी
कि मैंने उस आदमी
से दिल लगा लिया
जो खुद से ही दोस्ती
निभा नहीं पाया.

परिचय :- शिवदत्त डोंगरे (भूतपूर्व सैनिक)
पिता : देवदत डोंगरे
जन्म : २० फरवरी
निवासी : पुनासा जिला खंडवा (मध्य प्रदेश)
सम्मान : राष्ट्रीय हिंदी रक्षक मंच इंदौर द्वारा “समाजसेवी अंतर्राष्ट्रीय सम्मान २०२४” से सम्मानित
घोषणा पत्र : प्रमाणित किया जाता है कि रचना पूर्णतः मौलिक है।


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