Tuesday, February 17राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर आपका स्वागत है... अभी सम्पर्क करें ९८२७३६०३६०

गंगा मैया ने सुनली पुकार

प्रेम नारायण मेहरोत्रा
जानकीपुरम (लखनऊ)
********************

गंगा मैया ने सुन ली पुकार,
बुलावा भेज दिया।
देखी बच्चे की तड़प अपार,
बड़ा उपकार किया।
गंगा मैया ने सुन ली …

माघ मेला सजाती है मैया मेरी,
अपने बच्चों को बाहों में लेने के मित।
जो समझ पाते है अपनी मां की तड़प,
वो लगाते हैं डुबकी तो उनका है हित।
मां ने आंचल में अपने बुला बच्चो को,
उन पर अपना दुलार बहा है दिया।
गंगा मैया ने सुन ली …

निकली गौमुख से,
और जाके सागर मिली।
निकली जिस तीर्थ से,
उसकी महिमा बढ़ी।
जहां निकली और बच्चे मिलन आए तो,
उनपे अपनी कृपा बरसा है दिया।
गंगा मैया ने सुन ली …

मैने हरद्वार में मां को पाया बहुत,
भाव आया कि भक्तों को लेकर चलूं।
वृद्धों की सेवा का फल मिलेगा मुझे
साथ जाने वाला धन कमाता चलूं।
मेरे आराध्य ने सात्विक भाव को,
देके साहस सदा ही है पूरा किया।
गंगा मैया ने सुन ली …

परिचय :- प्रेम नारायण मेहरोत्रा
निवास : जानकीपुरम (लखनऊ)
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है।


प्रिय मित्र, शुभचिंतक एवं परिवारजन आपको प्रेषित मेरी नई स्वरचित रचना, कृपया लिंक को टच कर रचना पढ़ें एवं कमेंट बॉक्स में अपने विचार रख कविता को लाइक करें …🙏🏻😊💐💐💐 राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपनी रचनाएँ
प्रकाशित करवाने हेतु अपनी कविताएं, कहानियां, लेख हिंदी में टाईप करके हमें
hindirakshak17@gmail.com पर अणु डाक (मेल) कीजिये, अणु डाक करने के बाद हमे हमारे नंबर 98273 60360 पर सूचित अवश्य करें …🙏🏻 राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच का सदस्य बनने हेतु हमारे चलभाष क्रमांक 98273 60360 पर अपना नाम और कृपया मुझे जोड़ें लिखकर हमें भेजें…🙏🏻

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *