
सुषमा शुक्ला
इंदौर (मध्य प्रदेश)
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जीवन एक सिक्का है, दो पहलू संग लाता है,
एक तरफ़ समस्या खड़ी, दूजा राह दिखाता है।
छाया संग धूप चले, यह जग का है विधान,
दुख की काली रात में ही, जागे सुख की पहचान।
काँटों से घबराए जो, फूलों तक ना पहुँच पाए,
जो ठोकर को समझे पाठ, वही मंज़िल को अपनाए।
हर उलझन एक पहेली है, जो हल माँगती जाती,
धैर्य अगर साथी बन जाए, राह स्वयं बन जाती।
समस्या जब सिर उठाए, मन थोड़ा घबराता है,
समाधान वहीं छुपा होता, जहाँ डर सताता है।
आंधी से जो टकराएगा, वही दीप बन पाएगा,
हिम्मत की लौ जलाकर ही, अंधियारा हट पाएगा।
शिकायत से कुछ न मिले, बस मन बोझिल होता है,
प्रयासों की चाबी से ही, हर ताला फिर खुलता है।
ठहराव नहीं जीवन में, संघर्ष ही पहचान,
गिरकर फिर से उठ जाना, यही असली सम्मान।
सिक्का जब तक चलता है, कीमत वही बताता,
रुक जाए जो हाथों में, मूल्य स्वयं खो जाता।
इसलिए समस्या को भी, मुस्काकर अपनाओ,
हर मुश्किल के भीतर ही, समाधान को पाओ।
परिचय :- सुषमा शुक्ला
निवासी : इंदौर (मध्य प्रदेश)
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