
सुषमा शुक्ला
आबिदजान (अफ्रीका)
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कोई पूछे तो धन्यवाद, ना पूछे तो समझो प्रसाद,
सेवा का सच्चा सुख मिले, बस इतना ही है इराद।
मनुष्य जिए अपने लिए, स्वस्थ रहे, सुखी रहे,
दिखावे की चादर ओढ़े क्यों, सच मन में ही रुके रहे।
सेवा यदि की निस्वार्थ भाव से, फल उसका तुम पाओगे,
तालियाँ चाहे कम मिलें, भीतर दीप जलाओगे।
प्रशंसा की प्यास छोड़ दो, कर्म को ही साथी मान,
जो बोओगे वही उगेगा, यही है जीवन का विधान।
जो करते हो स्वयं के सुख को, वही सच्चा उत्सव है,
बिना दिखावे का जीवन ही, सबसे बड़ा अनुभव है।
परिचय :- सुषमा शुक्ला
जन्म : 25 अप्रैल
निवास : आबिदजान (अफ्रीका)
मूल निवासी : इंदौर (मध्य प्रदेश)
शिक्षा : एमए राजनीति शास्त्र बरकतुल्लाह भोपाल विश्वविद्यालय
लेखन विधा : कविता, हायकु, पिरामिड, लघु कथा
लेखन : लेखन के क्षेत्र में कोविद में जीवनसाथी की प्रेरणा से लेखन का कार्य शुरू किया। धर्म और संस्कृति इन मंचों पर काव्य गोश्तियां संचालन किया मनपसंद हास्य कला साहित्य मंच पर कम से कम १२५ बार संचालन किया,, और चार बार अध्यक्ष पद प्राप्त किया। इन सभी संस्थाओं से अब तक कुल मिलाकर १२५ सम्मान पत्र प्राप्त हुए।
विशेष : नाइजीरिया में, लागोस शहर में हिंदी भाषा का प्रचार प्रसार किया। अफ्रीका के आबिदजान शहर में हिंदी विश्व दिवस पर हिंदी के बावत भूषण और एक छोटी सी कविता पढ़ने का भारतीय दूतावास इंडियन एंबेसी में शुभ अवसर प्राप्त हुआ। तात्कालीन भारतीय राजदूत डॉक्टर राजेश रंजन के हाथों ससम्मान १०,००० सीफा राशि आबिदजान की मुद्रा, जिसे स्थानीय भाषा में सीफा कहा जाता है प्रदान की गई।
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