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मेरे आराध्य

प्रेम नारायण मेहरोत्रा
जानकीपुरम (लखनऊ)
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मेरे आराध्य देते भाव,
तो मैं गीत लिखता हूं।
श्रेष्ठ गायक सकें गा,
इसलिए संगीत लिखता हूं।
मेरे आराध्य …

करी आराध्य ने करुणा कृपा,
तो राम मन भाए।
लिखाई राम महिमा,
जिसको गायक झूमकर गाये।
न मैं कवि हूं न हूं गायक,
समर्पण व्यक्त करता हूं।
मेरे आराध्य …

तुम्ही ने प्रेरणा करके,
नाम मधुशाला लिखवाई।
जिसे संगीत और स्वर दे,
विवेक और रोली ने गाई।
सुनाते नाम महिमा तुम,
कलम को मैं चलाता हूं।
मेरे आराध्य …

लिखाते गीत मीटर में,
तो गायक डूबकर गाते।
जो गाते डूबकर भक्ति में,
वो तेरी कृपा पाते।
करी इतनी कृपा जिसका मै,
हरपल गान करता हूं।
मेरे आराध्य …

मेरे आराध्य तुमसे ये ही,
विनती दास की तेरे।
रमू बस नाम सेवा में,
न अब माया मुझे घेरे।
जो दी है नाम की सेवा,
उसे निष्ठा से करता हूं।
मेरे आराध्य …

परिचय :- प्रेम नारायण मेहरोत्रा
निवास : जानकीपुरम (लखनऊ)
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है।


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