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रामायण सार

सुषमा शुक्ला
आबिदजान (अफ्रीका)
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(१)
आदर्शों की अयोध्या में जन्मा मर्यादा का उजास,
राम बने धर्म-दीप, जिनसे जग ने सीखा विश्वास।
राजा दशरथ की वाणी, वचन बना पथ का शूल,
त्याग की कसौटी पर चढ़ा, राजसिंहासन का मूल।

(२)
वन-पथ पर संग सीता, लक्ष्मण बने छाया-सार,
कांटों में भी खिला कुसुम, प्रेम रहा आधार।
शबरी के बेरों में मिला भक्ति का निर्मल स्वाद,
साधारण हृदय में बसता, ईश्वर का संवाद।

(३)
अहंकार के रथ पर चढ़ा, लंका का वह अभिमान,
सीता-हरण से काँप उठा, मानव-मूल्य विधान।
अशोक-वाटिका में धैर्य, दीपक-सा जलता रहा,
नारी-सम्मान का शिखर, इतिहास लिखता रहा।

(४)
हनुमान बने सेतु-स्वप्न, शक्ति का संयम रूप,
वानर-सेना ने बाँधा, आशा का दृढ़ अनूप।
राम-रावण संग्राम में, नीति ने पाई जीत,
अधर्म ढहा, धर्म उठा, सत्य हुआ प्रतिष्ठित।

(५)
अयोध्या लौटा उजियारा, दीपों ने ली अंगड़ाई,
राम-राज्य का अर्थ बना- न्याय, करुणा, भलाई।
रामायण कहती हर युग से, यह जीवन का गान-
त्याग, प्रेम और कर्तव्य से, बनता है महान।

परिचय :- सुषमा शुक्ला
जन्म : 25 अप्रैल
निवास : आबिदजान (अफ्रीका)
मूल निवासी : इंदौर (मध्य प्रदेश)
शिक्षा : एमए राजनीति शास्त्र बरकतुल्लाह भोपाल विश्वविद्यालय
लेखन विधा : कविता, हायकु, पिरामिड, लघु कथा
लेखन : लेखन के क्षेत्र में कोविद में जीवनसाथी की प्रेरणा से लेखन का कार्य शुरू किया। धर्म और संस्कृति इन मंचों पर काव्य गोश्तियां संचालन किया मनपसंद हास्य कला साहित्य मंच पर कम से कम १२५ बार संचालन किया,, और चार बार अध्यक्ष पद प्राप्त किया। इन सभी संस्थाओं से अब तक कुल मिलाकर १२५ सम्मान पत्र प्राप्त हुए।
विशेष : नाइजीरिया में, लागोस शहर में हिंदी भाषा का प्रचार प्रसार किया। अफ्रीका के आबिदजान शहर में हिंदी विश्व दिवस पर हिंदी के बावत भूषण और एक छोटी सी कविता पढ़ने का भारतीय दूतावास इंडियन एंबेसी में शुभ अवसर प्राप्त हुआ। तात्कालीन भारतीय राजदूत डॉक्टर राजेश रंजन के हाथों ससम्मान १०,००० सीफा राशि आबिदजान की मुद्रा, जिसे स्थानीय भाषा में सीफा कहा जाता है प्रदान की गई।
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।


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