
मीना भट्ट “सिद्धार्थ”
जबलपुर (मध्य प्रदेश)
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दर्शन को अँखियाँ प्यासी हैं, उर बसे मनमीत।
चातक मन मेरा है व्याकुल, श्याम कैसी प्रीति।।
मुझको नहीं दिन-रात चैना, है किशन संताप।
चहुँओर दिखता है अँधेरा, हाथ थामो आप।।
नित आचरण हो शुद्ध मेरा, दो प्रभु वरदान।
कर क्षम्य सब अपराध मेरे, रख प्रभो कुछ ध्यान।।
मीरा बनी भटकी किशन मैं, गा रही प्रभु गीत।
चातक मन मेरा है व्याकुल, श्याम कैसी प्रीति।।
पलकें बिछायें राह देखूँ, अब समझ लो पीर।
सागर बिना प्यासी नदी मैं, अब नहीं है धीर।।
चितचोर हो समझो प्रभो अब, श्याम हो आधार।
मनमोहना दो मोक्ष मुझको, थाम लो पतवार।।
जीवन सँवारों नाथ मेरा, भक्त की हो जीत।
चातक मन मेरा है व्याकुल, श्याम कैसी प्रीति।।
छोड़ मोह-माया सब आयी, बस तुम्हीं से आस।
हूँ मूढ़मति पर दास तेरी, हो तुम्हीं विश्वास।।
मिथ्या जगत कान्हा शरण लो, हो कृपा भी नाथ।
सरकार अब अनुभास हो सुख, थाम लो तुम हाथ।।
प्रतिपाल हो दाता तुम्हीं हो, श्याम सुर संगीत।
चातक मन मेरा है व्याकुल, श्याम कैसी प्रीति।।
परिचय :- मीना भट्ट “सिद्धार्थ”
निवासी : जबलपुर (मध्य प्रदेश)
पति : पुरुषोत्तम भट्ट
माता : स्व. सुमित्रा पाठक
पिता : स्व. हरि मोहन पाठक
पुत्र : सौरभ भट्ट
पुत्र वधू : डॉ. प्रीति भट्ट
पौत्री : निहिरा, नैनिका
सम्प्रति : सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश (मध्य प्रदेश), लोकायुक्त संभागीय सतर्कता समिति जबलपुर की भूतपूर्व चेयरपर्सन।
प्रकाशित पुस्तक : पंचतंत्र में नारी, काव्यमेध, आहुति, सवैया संग्रह, पंख पसारे पंछी
सम्मान : विक्रमशिला हिंदी विश्वविद्यालय द्वारा, विद्या सागर और साहित्य संगम संस्थान दिल्ली द्वारा, विद्या वाचस्पति की मानद उपाधि, गुंजन कला सदन द्वारा, महिला रत्न अलंकरण, राष्ट्रीय हिंदी रक्षक मंच इंदौर द्वारा “उत्कृष्ट न्यायसेवा अंतर्राष्ट्रीय सम्मान २०२४” से सम्मानित तथा कई अन्य साहित्यिक संस्थाओं से सम्मानित
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।
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