
छत्र छाजेड़ “फक्कड़”
आनंद विहार (दिल्ली)
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अनमना सा बच्चा
झांक रहा है
खिड़की के पार
करे भी तो क्या
घर में होकर भी वह
अकेला है बच्चा …
माँ को वक्त कहाँ है
जी रही है आधुनिक
परिवेश में व्यस्त है
कभी कीट्टी में
कभी किसी गोष्ठी में
कभी किसी क्लब फंक्शन में
तो कभी फैशन शो में
वक्त बचता ही कहाँ है
खबर लेने, संभालने बच्चा
क्या चाहता है वह
घर में निपट अकेला है
वो मासूम बच्चा …
पिता
उलझा है
व्यवसायिक उलझनों में
व्यवसाय हो या नौकरी
समस्या बनी रहती है
“कंपीटीटिव मार्केट”
जिन्दगी भरी है
भांति-भांति की व्यस्तताओं से
येन-केन-प्रकारेण
थका हारा घर पहुँचता है
भान नहीं रहता अर्धरात्रि में
सोई है आत्मा
लेटता है काँटो भरी
सुमन शैया पर
वक्त बचता कहाँ जानने का
वो चाहता है क्या
घर में पड़ा
निपट अकेला बच्चा …
टूट रहे संयुक्त परिवार
गुम हुये नाते-रिश्ते
कौन चाचा, कौन ताया
कौन मौसी, कौन भुवा
सारे संबंध गौण
बस हम दो, हमारे दो
सिमटा सब एकाकी मन में
टीस उठे थके तन में
किससे रूठे, कौन मनाये
चंदामामा की कहानी कौन सुनाये
क्या समझे अंतर्द्वन्द सरल मन
काश..! दीवारें पूछ सकती
क्या चाहता है
दैया भरोसे
मासूम, बेबस बच्चा …
साधन है, मगर गौण हुये साध्य
व्यवस्था है, मगर गौण है स्वास्थ्य
जीवन की गति बँधी है
घड़ी के काँटो से
अनुशासन तो है
मगर…, ढूंढ रहा है प्यार
अपनेपन से दूर
सालता है मन एकाकीपन
किसे कहे मन की बात
पा सके प्यार, दुलार
तरसता रहे मायूस
ताकता सूनी आँखों से
घर में पड़ा
अकेला बच्चा …
परिचय :- छत्र छाजेड़ “फक्कड़”
निवासी : आनंद विहार, दिल्ली
विशेष रूचि : व्यंग्य लेखन, हिन्दी व राजस्थानी में पद्य व गद्य दोनों विधा में लेखन, अब तक पंद्रह पुस्तकों का प्रकाशन, पांच अनुवाद हिंदी से राजस्थानी में प्रकाशित, राजस्थान साहित्य अकादमी (राजस्थान सरकार) द्वारा, पत्र पत्रिकाओं व समाचार पत्रों में नियमित प्रकाशन, राजस्थानी लोक गीतों के लिए प्रसिद्ध कंपनी “वीणा कैसेटस” के दो एलबमों में सात गीत संगीतबद्ध हुये हैं।
सम्मान : “राजस्थानी आगीवान” सम्मान से सम्मानित
श्री गंगानगर के सृजन साहित्य संस्थान का सृजन साहित्य सम्मान व
सरदारशहर गौरव (साहित्य) सम्मान व अनेक अन्य सम्मानरा
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।
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