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वो कम ख़ुदा न थी

शिवदत्त डोंगरे
पुनासा जिला खंडवा (मध्य प्रदेश)
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चार जने बैठे थे
जीमने रात का
भोजन
सब बच-बच कर
खा रहे
तीनों बच्चे तक
समझदार
पीते बीच-बीच में
पानी पिता लेते
नक़ली डकार.

पर कम ख़ुदा न थी
परोसने वाली
बहुत है खुदा
अभी इसमें
मैंने तो
देर से खाया
कहते
परोसती जाती.

माँ थी
सबके बाद
खाने वाली
जिसके लिए
दाल नहीं
देवकी में
बची थी हलचल
चुल्लू भर पानी की
और कटोरदान में
भाप के चंद्रमा जैसी
रोटी की छाया थी।

परिचय :- शिवदत्त डोंगरे (भूतपूर्व सैनिक)
पिता : देवदत डोंगरे
जन्म : २० फरवरी
निवासी : पुनासा जिला खंडवा (मध्य प्रदेश)
सम्मान : राष्ट्रीय हिंदी रक्षक मंच इंदौर द्वारा “समाजसेवी अंतर्राष्ट्रीय सम्मान २०२४” से सम्मानित
घोषणा पत्र : प्रमाणित किया जाता है कि रचना पूर्णतः मौलिक है।


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