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जिंदगी की सीख

चेतना सिंह प्रकाश “चितेरी”
प्रयागराज (उत्तर प्रदेश)

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जिंदगी रुला रही है-रो लें,
जिंदगी हँसा रही है-हँस लें।
जिंदगी अभिनय करा रही है-
मुस्कुरा निभा लें,
जिंदगी एक सफर है-
अनंत की ओर बढ़ चलें।

जिंदगी मुसाफिर है इस संसार में,
आना-जाना इसका नियम पुराना है।
रुक न पाया कोई यहाँ कभी,
यादों का ही बस खजाना है।

यहीं मोह का बंधन है,
गहरे रिश्तें भी टूट जाना है ।
अपनों का बिछड़ना- यहीं रोना है।
सबको एक दिन छोड़ जाना है,
चाहे जितना चाहें भी कुछ न भूल पाना है।

परिचय :- चेतना सिंह प्रकाश “चितेरी”
निवासी : प्रयागराज (उत्तर प्रदेश)
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है।


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