
मीना भट्ट “सिद्धार्थ”
जबलपुर (मध्य प्रदेश)
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कुलवंती दयमंती है वह
घर की लक्ष्मी हर नारी।
तीनों लोकों में यश उसका
सारा जग है बलिहारी।।
उर विशाल माँ दुर्गा जैसा,
जगजननी कहलाती है।
जन्मे गर्भ से देवता हैं,
धरती स्वर्ग बनाती है।।
साहस करुणा की हे देवी,
अभिनंदन है अवतारी।
आशा है विश्वास वही है,
दिव्य शक्ति है कल्याणी।
जगत् को संजीवनी देती,
मधुरस पूरित है वाणी।।
सब रूपों में पूजित नारी,
देखो सब पर है भारी।
अपना धर्म निभाती हँसकर,
पीर जगत् की हरती है।
कर्म करे श्रद्धा से अपना,
धरा उर्वरा करती है।।
चहुँदिशि जय-जयकार उसी की,
संकल्पों की फुलवारी।
कीर्तिमान नित नूतन रचती,
ध्वजा प्रगति की फहराती।
करती है उत्थान देश का,
अंतरिक्ष तक वह जाती।।
त्यागी लक्ष्मी स्वाभिमानिनी,
दुर्गावती कहाँ हारी।
परिचय :- मीना भट्ट “सिद्धार्थ”
निवासी : जबलपुर (मध्य प्रदेश)
पति : पुरुषोत्तम भट्ट
माता : स्व. सुमित्रा पाठक
पिता : स्व. हरि मोहन पाठक
पुत्र : सौरभ भट्ट
पुत्र वधू : डॉ. प्रीति भट्ट
पौत्री : निहिरा, नैनिका
सम्प्रति : सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश (मध्य प्रदेश), लोकायुक्त संभागीय सतर्कता समिति जबलपुर की भूतपूर्व चेयरपर्सन।
प्रकाशित पुस्तक : पंचतंत्र में नारी, काव्यमेध, आहुति, सवैया संग्रह, पंख पसारे पंछी
सम्मान : विक्रमशिला हिंदी विश्वविद्यालय द्वारा, विद्या सागर और साहित्य संगम संस्थान दिल्ली द्वारा, विद्या वाचस्पति की मानद उपाधि, गुंजन कला सदन द्वारा, महिला रत्न अलंकरण, राष्ट्रीय हिंदी रक्षक मंच इंदौर द्वारा “उत्कृष्ट न्यायसेवा अंतर्राष्ट्रीय सम्मान २०२४” से सम्मानित तथा कई अन्य साहित्यिक संस्थाओं से सम्मानित
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