
इंद्रजीत सिहाग “नोहरी”
गोरखाना, नोहर (राजस्थान)
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भारत आजाद कराने, दीवानों की वो टोली चली थी,
आजादी की किताबों से, हमने बस सुनी कहानी थी।
न जाने कितने परवानों ने, सीने पर खाई गोली थी,
मन में अडिग संकल्प लिए, उन्होंने ही क्रांति जगाई थी।
इतिहास के पन्नों में पढ़ लेना, आजादी जिनकी दीवानी थी,
आजादी की किताबों से, हमने बस सुनी कहानी थी।
माँ भारती की मुक्ति को, वीरों ने हँसकर कुर्बानी दी थी,
कोई कैसे कह दे हमको, केवल अहिंसा से आजादी मिली थी?
हाँ यह भी पढ़ना, कितनी ‘लक्ष्मी’ रणचंडी बन लड़ी थीं,
आजादी की किताबों से, हमने बस सुनी कहानी थी।
स्वातंत्र्य-यज्ञ की वेदी पर, कितनी ही माँओं की गोद सूनी थी,
न जाने कितनी बहनों ने, अपनी राखी वाली कलाई खोई थी।
खदेड़ दिया फिरंगियों को, जमकर धूल चटाई थी,
आजादी की किताबों से, हमने बस सुनी कहानी थी।
जहाँ मूंड कटे पर रुंड लड़े, लाशों पर लाशें बिछी थीं,
हाँ, रक्त से लिखी उन वीरगाथाओं ने, हमें आजादी दिलाई थी।
परिचय :- इंद्रजीत सिहाग “नोहरी”
उपनाम : “नोहरी”
पिताजी का नाम : श्री भानीराम सिहाग
माताजी का नाम : कांता देवी
अर्धांगिनी का नाम : माया देवी
जन्म दिनांक : १३/०७/१९९१
सम्प्रति : शिक्षक
शिक्षा : दो बार स्नातकोत्तर, बीएड
निवासी : गोरखाना तहसील नोहर ज़िला- हनुमानगढ़ (राजस्थान)
प्रकाशित रचनाएं : “समरसता के अग्रदूत” साझा काव्य संकलन मुख्य सम्पादक, “सृजन सागर के मोती” साझा काव्य संकलन उपसंपादक, “इंद्र का जाल” प्रकाशन ज़ारी… वर्तमान में विश्व हिंदी सृजन सागर मंच के बतौर अध्यक्ष
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।
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