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मृत्यु

मालती खलतकर
इंदौर (मध्य प्रदेश)
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क्यों तुमसे सब डरते हैं
क्यों रोते हैं तुम आने पर
तुमसे हैं जो सुखद शान्ति
देता नहीं कोई जीवन भर।
तुम असीम शांति दात्री
अवसादों से दो मुक्ति
तुम सम्बल हो जीवन
जीने का तुमसे सीख धैर्य की।
तुम पावन शान्त स्थिर जल सी
तुम अट्टहास जीवन का
जीवन की ज्वलंत मुर्ति
तुम निरंन्तर चलायमान
न रुकने वाली
न मुड़ने वाली पगडंडी।
तुम क्या हो, कुछ तो कहो
कही तो दिखो
क्यों है, तुम्हारी
अदृश्य अनुभुति
भय विषाद के साथ होता है
आगमन तुम्हारा
कुछ क्षण,
दहलीज़ पर रुकतीं
कब कैसे पता नहीं।
कहीं नदी, पहाड़,
झरनें, पगडंडी
पर पतंग सी
फड़फड़ाती आती
या कहुं गिद्ध सी
घात लगाती
और, क्षण में
विभत्स दृष्य दिखा
स्वयं चुपचाप निकल जाती।
क्यों करता नहीं कोई
तूम्हारी अगवानी
क्यों नहीं बान्थता
तुम्हारे नाम का सेहरा
तुम्हे, हां तुम्हें बुलाता हैं
कोई, कोढी, कष्टी दिर्घायु
क्यों नहीं उसका
आतिथ्य स्वीकारती।
क्यों करती हों
यौवना की मांग रिती।
कर थाम, पीछे न मुड़कर
विलिन हो जाती
कल, पुनः कहीं
ओर जानें के लिएं
कोई नहीं कहता तुम्हें
कुछ श्रण रुकने के लिए
न, कोई कहता, ठहरो,
मैं… आ रहा हूं,
चलता हूं कोई नहीं कहता।

परिचय :- इंदौर निवासी मालती खलतकर आयु ६८ वर्ष है आपने हिंदी समाजशास्श्र में एम ए एल एलबी किया है आप हिंदी में कविता कहानी लेख गजल आदि लिखती हैं व आपकी रचनाएँ विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं मैं प्रकाशित होते हैं आप सन १९६८ से इंदौर के लेखक संघ रचना संघ से जुड़ी आप शासकीय सेवा से निमृत हैं पीछेले ३० वर्षों से धार के कवियों के साथ शिरकत करती रही आकाशवाणी इंदौर से भी रचनाएं प्रसारित होती रहती हैं आप राष्ट्रीय हिंदी रक्षक मंच इंदौर द्वारा “हिंदी रक्षक राष्ट्रीय सम्मान २०२३” से सम्मानित हैं।
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।


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