
मुकेश कुमार ऋषि वर्मा
फतेहाबाद, आगरा (उत्तर प्रदेश)
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अहिंसा, शांति, प्रेम, शिक्षा और साहित्य के अमर साधक, मानवता के अमर पुजारी महात्मा गांधी जी ने विश्व शांति के लिए जीवन भर कार्य किया। पृथ्वी पर भिन्न-भिन्न धर्म, भाषा- बोली, रंग- रूप हैं, परंतु हैं सभी ईश्वर की कृति। महात्मा गांधी जी ने सभी धर्मों का सम्मान किया। उनका मत था सर्वत्र समता और एकता संसार में स्थापित हो। संसार का सार प्रेम है, जो अहिंसा से जन्मता है। हिंसा से जिसका चित दुःखी हो वह मानव है और यही है दुनिया का असली धर्म है।
आज समग्र विश्व आतंकवाद, उग्रवाद, संघर्ष की दहशत में जी रहा है। इसका मुख्य कारण प्रतिशोध, घृणा, धर्मवाद, बदले की भावना है। अन्याय तथा शोषण अपने चरम पर है। आग के बदले आग व आंख के बदले आंख इस मानवी सोच ने मानवता को संकट व अशांति में डाल दिया है। इस समस्या का हल अहिंसा, क्षमा, प्रेम, शांति से ही निकल सकता है। अगर हम बदले की भावना से कार्य करते रहे तो परिणाम बरबादी ही निकलेगा। अगर हमें देश-दुनिया में विकास देखना है तो महात्मा गांधी की विचारधारा को अपनाना ही पड़ेगा।
अहिंसा व विश्वधर्म में ही मानवता की हर समस्या का समाधान छिपा है। विश्वधर्म यानी मानवता सिखाती है कि मनुष्य अपने कर्तव्यों से दूसरों के अधिकारों की रक्षा करे। मानवता ही जीवन का आधार है। मानवता से ही सच्ची आध्यात्मिकता का जन्म संभव है। सच्ची आध्यात्मिकता से मानव हृदय पवित्र होता है। पवित्र हृदय में ही सत्य, अहिंसा, प्रेम, करुणा का जन्म स्वत: हो जाता है। जो व्यक्ति क्षमाशीलता से स्वयं प्रसन्न रहता है वो औरों को भी प्रसन्नता का वरदान देने में सक्षम है। २ अक्टूबर पूरे विश्व में अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह पर्व महात्मा गांधी का जन्म दिवस है और इसी उपलक्ष्य में उक्त पर्व मनाया जाता है।
संसार के सभी धर्मों का एक ही मत है, मानव का कल्याण हो। मनुष्य के पास एक ही ऐसी शक्ति है जो उसे आपस में जोड़ती है विश्वधर्म… विश्वधर्म वह पक्षी है जो मंदिर पर बैठता है, मस्जिद पर भी बैठता है और गिरिजाघर व गुरुद्वारे पर भी बैठता है। विश्वधर्म से ही समूची विश्व का लोक कल्याण संभव है। इसी में विश्वशांति का राज छुपा है। धर्म मनुष्य के जीवन को दिशा, नैतिकता और आध्यात्मिकता देता है। दुनिया में सैकड़ों धर्म हैं, पंथ हैं। अगर कोई एक धर्म संसार को स्वर्ग बना सकता है तो वो विश्वधर्म यानी मानवता ही है।
“मत पूछो धर्म क्या है ?
मत पूछो पंथ क्या है ?
मत पूछो जाति क्या है ?
हम मानवता के पुजारी हैं
धर्म, जाति, पंथ, रूप रंग से परे
रोटी का कोई धर्म हो सकता है
पानी का कोई धर्म हो सकता है भला…!”
हम विश्वधर्म के पथिक हैं और इसी पर चलकर विश्वशांति का प्रेमरूपी दिया जलाते रहेंगे। संसार की सबसे बड़ी व पवित्र राहें सत्य, अहिंसा, प्रेम ! जो इन पर चला वो विश्वधर्म का सच्चा पुजारी है। नफरत-हिंसा को क्षणभर में पूर्णरूप से मिटा दे वो सादगीयुक्त सच्चा प्रेम मानवता से ही उपजता है। आईए हम सब विश्वधर्म के अनुयाई बनें और विश्वशांति को जन्म दें।
निवासी : फतेहाबाद, आगरा (उत्तर प्रदेश)
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