
मुकेश कुमार ऋषि वर्मा
फतेहाबाद, आगरा (उत्तर प्रदेश)
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ऋषि वैदिक विद्यापीठ के आचार्य ऋषि कुमार अपने विद्यार्थियों को पर्यावरण के विषय में पढ़ा रहे थे। कक्षा में शांति थी, सभी छात्र-छात्राएं बड़े मनोयोग से एकचित्त होकर आचार्य श्री की बातों को सुन रहे थे, तभी छात्र विवेक बोल उठा, ‘आचार्य श्री हमें पेड़-पौधों के संबंध में वैज्ञानिक दृष्टि से जानकारी दीजिए क्या इनमें भी प्राण शक्ति होती है।’ आचार्य श्री ने विवेक के प्रश्न को ध्यान से सुना और उसकी शंका मिटाने के लिए जानकारी देने लगे ।
‘देखो बच्चों ! हाल ही में पोलैंड के वारसा विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने शोध किया और पता लगाया है कि पौधों का भी अपना एक नर्वस सिस्टम होता है। पौधे स्वयं को मौसम के मुताबिक खुद को ढाल लेते हैं। साथ ही अपने अंदर रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास भी कर लेते हैं। ठीक हमारी-तुम्हारी तरह, पेड़-पौधों में भी जीवन होता है। यही बात दशकों पूर्व हमारे वैज्ञानिक आचार्य जगदीश चंद्र बसु ने अपनी खोजों व आविष्कारिक यंत्रों के आधार पर प्रमाणित कर दी थीं। आचार्य बसु ने सारी दुनिया को बताया था कि पौधों में भी जीवन होता है। इन्हें भी हमारी तरह गर्मी-सर्दी, दुःख -दर्द का अनुभव होता है। पेड़ -पौधे संवेदनशील होते हैं। बाहरी उत्तेजना पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हैं।
हमारे प्राचीन वेद-पुराणों व ऋषि-महात्माओं ने भी पेड़-पौधों से किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ की अनुमति नहीं दी है।’
तभी आर्यन बोल पड़ा, ‘परंतु आचार्य श्री… आज पूरी दुनिया में जिस तरह से शहरों को बसाने व विकास के नाम पर पेड़ -पौधे काटे जा रहे हैं। इससे तो हमें बहुत हानि हो रही है।’
‘हां… जिस प्रकार से हम मानव स्वार्थी होकर प्रकृति से छेड़छाड़ कर रहे हैं। यह विनाश की ओर जाने के संकेत हैं। आज वातावरण पूरी तरह से प्रदूषित हो चुका है। पूरी सभ्यता खतरे में है।’ आचार्य श्री ने चिंतित होते हुए कहा।
तभी सभी विद्यार्थी एक साथ बोल उठे, ‘आज हम प्रण लेते हैं कि हम अपनी धरती, अपनी सभ्यता की रक्षा के लिए नये-नये पेड़-पौधे लगाएंगे और उनकी रक्षा करेंगे। अपनी धरती को सुरक्षित रखेंगे।’
“पर्यावरण बचाएं खुशहाली लाएं।”
निवासी : फतेहाबाद, आगरा (उत्तर प्रदेश)
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