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अहम ब्रम्हास्मि

धैर्यशील येवले
इंदौर (म.प्र.)

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जोड़ नाता मानवता से
ईश्वर मिलेगा सरलता से।।

जो ढूंढ रहा है तू बाहर
वो बैठा है तेरे ही भीतर
खोल कपाट अंतस के
कर दर्शन परमात्मा के
जीवन के खेल निराले
कुछ उजले कुछ काले
कह रहे कोमलता से

जोड़ नाता मानवता से
ईश्वर मिलेगा सरलता से।।

राम नाम की शरण में
मोक्ष छुपा है मरण में
जीवन को स्वर्ग बनाकर
दूजे का बन दिवाकर
नित नये आनंद पायेगा
जगत चैतन्य हो जायेगा
मिला दे कर्म धर्मता से

जोड़ नाता मानवता से
ईश्वर मिलेगा सरलता से।।

जीवन की यही आस है
प्रभुमिलन की प्यास है
भीतर मेरे जो घट रहा
लोगो मे है वो बट रहा
आलोकित है मन मेरा
दूर कर दूंगा तमस तेरा
नाता न रहा दुर्बलता से

जोड़ नाता मानवता से
ईश्वर मिलेगा सरलता से।।

सरिता के जल सा
वसुधा के तल सा
नभ के परिमल सा
दीप के अनल सा
पवन के निर्मल सा
हो गया मैं ब्रह्मांड सा
पंच तत्व की पावनता से

जोड़ नाता मानवता से
ईश्वर मिलेगा सरलता से।।

परिचय :- धैर्यशील येवले
जन्म : ३१ अगस्त १९६३
शिक्षा : एम कॉम सेवासदन महाविद्याल बुरहानपुर म. प्र. से
सम्प्रति : १९८७ बैच के सीधी भर्ती के पुलिस उप निरीक्षक वर्तमान में पुलिस निरीक्षक के पद पर पीटीसी इंदौर में पदस्थ।
सम्मान : राष्ट्रीय हिंदी रक्षक मंच इंदौर hindirakshak.com द्वारा हिंदी रक्षक २०२० राष्ट्रीय सम्मान
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।


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