
अन्नू अस्थाना
भोपाल (मध्य प्रदेश)
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कहां गए वो खेलने वाले साथी
कहां गई वो, खिलौने वाली टोली,
हम खेला करते थे एक साथ सभी साथी
चिंटू, रोली, मोली, गोली।गुल्ली-डंडा, कंचे, दोड़म भाग,
खींचा करते थे रस्सा-रस्सी,
पुगड़ा,पुगड़ी एक साथ।
खेला करते थे हम गिप्पा-गिप्पी
थम्बा-थम्बी लंगड़ा-लंगडी,
मारम पिट्टी और पिटडू कि होती बौछार
जरूरत नहीं पड़ती थी हमें,
जिम-विम जाने कि,
आयाम-व्यायाम करने कि।शुद्ध हवा का संचार,
सदा बना रहता आने जाने में।
अंधेरा होते ही खेल लेते थे हम,
छुपन-छुपाई हरदम
नहीं डरते थे तब हम,
क्योंकि खेल खिलौने वाली
टोली बनाए रखती हड़कंम।
अब छिप गए कहां, दीपू,
चिंटू, गोली, रानी, टीनू तुम
बाहर आ जाओ बच्चों,
देखो आ गया खेल खिलौने वाला
छोड़ो बच्चों बंद करो खेल मोबाइल का
बाहर निकलो शुद्ध हवा का संचार करो
अपने जीवन के अस्तित्व की लड़ाई में
लेखक परिचय :- अन्नू अस्थाना
निवासी :- भोपाल, मध्य प्रदेश
कविता लिखने कि प्रेरणा :- कवि संगोष्ठीयों में भाग लेते थे एवं कवियों से प्रेरणा स्वरूप हिन्दी भाषा से स्नेह होता चला गया तथा हिन्दी में कविता लिखने का ज्ञान होता चला गया।
वर्तमान कार्य:- हिन्दी टाइपिंग कार्य एवं छायप्रति (फोटो -काॅपी) कार्य
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