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इन्तजार

संजय वर्मा “दॄष्टि”
मनावर (धार)
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अधर बनी गुलाब पंखुरी
नयन बने कमल से
नयन भी करते
इशारे प्रेम के
बालो से निकली लट से
छुप जाते नयन
माथे पे बिंदिया सजी
लगती प्रभात किरण
कंगन की खनक
पायल की रुनझुन
कानो में घोल देती मिश्री
कमर तक लहराते
लटके बालों से
घटा भी शरमा जाए
हाथो में लगी
मेहंदी खुशबू
हवाओं को महकाए
सज धज के
दरवाजे की ओट से
इंतजार में
आँखों से आँसू
इन्तजार टीस के
बन जाते गवाह
इन्तजार होता
सौतन की तरह
बस इतनी सी दुरी
इन्तजार की
कर देती बेहाल
प्रेम रूठने का
आवरण पहन
शब्दों पर लगा
जाता कर्फ्यू
सूरज निकला
फिर सांझ ढली
फिर वही इंतजार
दरवाजे की ओट से
समय की पहचान
कर रहा कोई इंतजार
घर आने का
तितलियाँ उडी
खुशबू महकी
लबो पर खिल,
उठी गुलाब की पंखुड़ी
समय ने प्रेम को परखा
नववर्ष में चहका प्यार।

परिचय :- संजय वर्मा “दॄष्टि”
पिता :- श्री शांतीलालजी वर्मा
जन्म तिथि :- २ मई १९६२ (उज्जैन)

शिक्षा :- आय टी आय
व्यवसाय :- ड़ी एम (जल संसाधन विभाग)
प्रकाशन :- देश-विदेश की विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएँ व समाचार पत्रों में निरंतर पत्र और रचनाओं का प्रकाशन, प्रकाशित काव्य कृति “दरवाजे पर दस्तक”, खट्टे मीठे रिश्ते उपन्यास कनाडा-अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विश्व के ६५ रचनाकारों में लेखनीयता में सहभागिता भारत की और से सम्मान – २०१५, अनेक साहित्यिक संस्थाओं से सम्मानित
संस्थाओं से सम्बद्धता :- शब्दप्रवाह उज्जैन, यशधारा – धार, मगसम दिल्ली, राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच इंदौर (म.प्र.)
काव्य पाठ :- काव्य मंच/आकाशवाणी/ पर काव्य पाठ, शगुन काव्य मंच
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है।


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