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अरे चाँद तू मत इतराना

अंजनी कुमार चतुर्वेदी
निवाड़ी (मध्य प्रदेश)
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ओ अंबर के चाँद सलोने,
वसुधा पर आ जाओ।
जो सुहागिनें बाट जोहतीं,
उनको मत तरसाओ।

पावन पर्व, चौथ करवा का,
सब सुहागिनें करतीं।
पार्वती-शिव पूजन करके,
खुशियाँ दामन भरतीं।

बड़ा भाग्यशाली है चंदा,
गोरी तुझे निहारे,
जल्दी से तू सम्मुख आजा,
करना नहीं किनारे।

तुझे देख कर सभी सुहागिन,
मंद-मंद मुस्कातीं।
छलनी में दीपक रोशन कर,
तुझ पर वारी जातीं।

अरे चाँद तू मत इतराना,
उनको नहीं सताना।
वरना तुझको पड़ जाएगा,
बिना बजह पछताना।

एक चाँद, पहले से उनके,
घर में ही रहता है।
तू केवल अंबर में रहता,
वह दिल में रहता है।

रात अमावस जब-जब आती,
तू गायब हो जाता।
इतराने के कारण ही तू,
नभ में ही खो जाता।

उनका चाँद साथ में रहता,
कभी नहीं मुख मोड़े।
चाहे जैसी दशा-दिशा हो,
कभी साथ ना छोड़े।

सभी सुहागन तुझे पूजतीं,
फिर पानी पीती हैं।
लंबी उम्र मिले साजन को,
इसी लिए जीती हैं।

जब तक नीर बहे गंगा में,
नभ में चाँद सितारे।
दांपत्य सुखमय हो सबका,
प्यार कभी ना हारे।

परिचय :अंजनी कुमार चतुर्वेदी
निवासी : निवाड़ी (मध्य प्रदेश)
शिक्षा : एम.एस.सी एम.एड स्वर्ण पदक प्राप्त
सम्प्रति : वरिष्ठ व्याख्याता शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय क्रमांक २ निवाड़ी
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।


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