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पिता होना आसान नहीं होता

शशि चन्दन
इंदौर (मध्य प्रदेश)
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गगन चूमती इमारत का, नींव का
पत्थर होना आसान नहीं होता।।
कि अपने मुस्कुराते अधरों से,
हलाहल पीना आसान नहीं होता।।

रात को शीतल चांद, दिन को
सूरज सा तपना आसान नहीं होता।
कि इस मायावी जग में, निस्वार्थ
प्रेम करना आसान नहीं होता ।।

अपने खून पसीने से एक कोरी
किताब लिखना आसान नहीं होता।।
कि साध कर भागते समय को,
गीता बाँचना आसान नहीं होता।।

निर्मल कोमल हृदय को सक्ता का,
आवरण ओढ़ना आसान नहीं होता।
कि घर बाहर की जिम्मेदारियों को,
कांधे ढोना आसान नहीं होता।।

नर्म नर्म कलियों को सहेज,
ओक में भरना आसान नहीं होता ।
कि लड़खड़ाते कदमों को,
एक सही दिशा देना आसान नहीं होता।।

जीवन के खेल में, जीतकर भी
हारना आसान नहीं होता।
बैठ कर जमीन पर दिन में तारे
देखना आसान नहीं होता।।

फटे हाल घिसे जूते लिए, कड़ी
धूप में चलना आसान नहीं होता।
खाली खीसे से, खुशियों के सिक्के
निकलना आसान नहीं होता।।

अपने अरमानों की राख से,
चिराग जलाना आसान नहीं होता।
खुरदुरी हथेलियों से, नन्हें पोरों को
थामना आसान नहीं होता।।

आहट गमों की सुन हिमालय सा,
अडिग रहना आसान नहीं होता।
विचलित नदियों को अपने भीतर
समा लेना आसान नहीं होता।।

निर्माता निर्देशक नियंत्रक परीक्षक
संग परीक्षार्थी होना आसान नहीं होता।
बिन रेखाएं देखे उज्ज्वल सितारे,
भाग्य के करना आसान नहीं होता।।

कि शशि अपना सर्वस्व न्यौछावर कर,
पिता होना आसान नहीं होता ।
माटी के इस मानव तन में,
भगवान होना आसान नहीं होता।।

परिचय :- इंदौर (मध्य प्रदेश) की निवासी अपने शब्दों की निर्झर बरखा करने वाली शशि चन्दन एक ग्रहणी का दायित्व निभाते हुए अपने अनछुए अनसुलझे एहसासों को अपनी लेखनी के माध्यम से स्याह रंग कोरे कागज़ पर उतारतीं हैं, जो उन्हें खुशियों के आसमानी रंग देते हैं।
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है।


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