
संजय वर्मा “दॄष्टि”
मनावर (धार)
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विदा होते ही आँखों की
कोर में आँसू आ ठहरते
और आना/जल्द आना
कहते ही ढुलक जाते आँसू
इसी को तो रिश्ता कहते
जो आंखों और आंसुओ के
बीच मन का होता है
मन तो कहता और रहो
मगर रिश्ता ले जाता
अपने नए रिश्ते की और
जैसे चाँद को बादलों से होता
रिश्ता ईद/पूनम का जैसा
दिखता नहीं मन हो जाता बेचैन
हर वक्त निहारती आँखे
जैसे बेटी के विदा होते ही
सजल हो उठती आँखे
कोर में आँसू आ ठहरते
फिर ढुलकने लगते
आँखों में आंसू
विदा होने के पल चेहरे छुपते
बादल में चाँद की तरह
जब कहते अपने- और आना
दूरियों का बिछोह
संग रहता है आँसू
शायद यही तो
अपनत्व का है जादू
जो एक पल में आँसू
छलकाने की क्षमता रखता
जब अपने कहते- और आना
परिचय : संजय वर्मा “दॄष्टि”
पिता : श्री शांतीलालजी वर्मा
जन्म तिथि : २ मई १९६२ (उज्जैन)
शिक्षा : आय टी आय
निवासी : मनावर, धार (मध्य प्रदेश)
व्यवसाय : ड़ी एम (जल संसाधन विभाग)
प्रकाशन : देश-विदेश की विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएँ व समाचार पत्रों में निरंतर पत्र और रचनाओं का प्रकाशन, प्रकाशित काव्य कृति “दरवाजे पर दस्तक”, खट्टे मीठे रिश्ते उपन्यास कनाडा-अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विश्व के ६५ रचनाकारों में लेखनीयता में सहभागिता
सम्मान : राष्ट्रीय हिंदी रक्षक मंच इंदौर द्वारा “संकल्प शिरोमणि राष्ट्रीय सम्मान २०२३” से सम्मानित, भारत की और से सम्मान – २०१५, अनेक साहित्यिक संस्थाओं से सम्मानित
संस्थाओं से सम्बद्धता : शब्दप्रवाह उज्जैन, यशधारा – धार, मगसम दिल्ली, राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच इंदौर (म.प्र.)
काव्य पाठ : काव्य मंच/आकाशवाणी/ पर काव्य पाठ, शगुन काव्य मंच
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है।
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