Monday, January 12राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर आपका स्वागत है... अभी सम्पर्क करें ९८२७३६०३६०

सरिता

मीना भट्ट “सिद्धार्थ”
जबलपुर (मध्य प्रदेश)
********************

सरिता शीतल बह रही, देती जीवन दान।
नीर सुधा का सार है, दिव्य लोक पहचान।।

शैल-खंड कितने ढहे, सम्मुख सरिता धार।
कल-कल नदिया नाद का, करे नमन संसार।।

नदी तीर्थ है जान लो, पूजन करो सुजान।
प्यास बुझाती लोक की, सद्भावों की खान।।

सींचे सब तृणमूल को, अनुपम सुंदर घाट।
संचित रखते जल सदा, अद्भुत देखो पाट।।

सुंदर है मनमोहिनी, अंतर सागर वास।
धार-धार संचार में, सदा मिलन की आस।।

युग-युग से है बह रही, संस्कृति की पहचान।
गंगा जमुना का मिलन ,मोक्षदायिनी जान।।

सारी बाधा तोड़ती, बहती निर्मल गात।
जननी सी वत्सल रहे, करे प्रेम बरसात।।

जीवन आलोकित करे, सरिता सूर्य समान।
इसकी पावन धार में, बसे अलौकिक ज्ञान।।

बाधा बंधन सह रही, नहीं मानती हार।
इसका पूजन कीजिए, जग में बारंबार।।

इसे प्रदूषित मत करो, करती यह कल्याण।
इसके जैविक-सार में, संचित वैविध प्राण।।

परिचय :- मीना भट्ट “सिद्धार्थ”
निवासी : जबलपुर (मध्य प्रदेश)
पति : पुरुषोत्तम भट्ट
माता : स्व. सुमित्रा पाठक
पिता : स्व. हरि मोहन पाठक
पुत्र : सौरभ भट्ट
पुत्र वधू : डॉ. प्रीति भट्ट
पौत्री : निहिरा, नैनिका
सम्प्रति : सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश (मध्य प्रदेश), लोकायुक्त संभागीय सतर्कता समिति जबलपुर की भूतपूर्व चेयरपर्सन।
प्रकाशित पुस्तक : पंचतंत्र में नारी, काव्यमेध, आहुति, सवैया संग्रह, पंख पसारे पंछी
सम्मान : विक्रमशिला हिंदी विश्वविद्यालय द्वारा, विद्या सागर और साहित्य संगम संस्थान दिल्ली द्वारा, विद्या वाचस्पति की मानद उपाधि, गुंजन कला सदन द्वारा, महिला रत्न अलंकरण, राष्ट्रीय हिंदी रक्षक मंच इंदौर द्वारा “उत्कृष्ट न्यायसेवा अंतर्राष्ट्रीय सम्मान २०२४” से सम्मानित तथा कई अन्य साहित्यिक संस्थाओं से सम्मानित
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *