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छत्तीसगढ़िया दिलवाला होथे

राजेन्द्र लाहिरी
पामगढ़ (छत्तीसगढ़)
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(छत्तीसगढ़ी बोली)

हम वो करम
करबो जउन
इंसानियत अउ
मानवता बर जरूरी हे,
बाकी हर हमेशा
हम देखत हन
हमर घेंच म हर
बेरा लटके छुरी हे,
ए सब करे बर न कोनो
देबी चाही न कोनो देवता,
हमर अपन छत्तीसगढ़िया
परब आय छेरता,
जिहां अपन उपज के खुशी म
सगरो मिलजुलके
मनाथन तिहार,
एही म हमर जीत अउ
एही म हमर हार,
जीत एखर बर के हम
दिलवाला हन,
हार एकर बर नइ दिखय
चढ़ाय जालापन,
एमा काखरो कोनो
योगदान नइ हे,
सब दान करत हन
अइसना हमर हिरदई हे,
मुठी भर अन्न
अउ पेट भर खाना,
सदा दिन ले करत आत हे
छत्तीसगढ़िया दीवाना,
जतको कमाएन पायेन,
जादा रहय चाहे कम
अपन बर हाथ बढ़ायेन,
छेरछेरा कोनो धार्मिक
तिहार हे न कोनो सामाजिक,
हमर हिरदे ले जुरे
तिहार हे वास्तविक,
त आवव तिहार
खुलके मनावव,
छत्तीसगढ़िया मन
दिलवाला होथे
सबो ल बतावव।

परिचय :-  राजेन्द्र लाहिरी
निवासी : पामगढ़ (छत्तीसगढ़)
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।

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