
अशोक कुमार यादव
मुंगेली (छत्तीसगढ़)
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नया साल बड़े ही धूमधाम से मनाना है।
कुछ पाने के लिए, कुछ कर दिखाना है।।
जीत होगी या हार होगी, मत सोचो तुम,
हर हाल में मंजिल के शिखर तक जाना है।।
जब तक साँसे चल रही है, तुझमें भी है दम।
कई बाधाएँ आएँगी, रुक मत, बढ़ा कदम।।
गिरकर फिर उठ, संभाल अपने आप को,
आँधी और तूफान बन, वज्र का बना बदन।।
छद्मरूप त्याग कर, भाग्य का लिखा बदल।
नये ज्ञान-विज्ञान से, जीवन में ला हलचल।।
असंभव को संभव कर, तू कुछ बन सकता है,
विद्या प्रकाश पुस्तक में ध्यान लगा हर-पल।।
अंतर्मन की ज्वालामुखी को, ज्ञान से धधका।
अपने आप को लक्ष्य से कभी भी मत भटका।।
तू है धुरंधर, अंधाधुंध कर परीक्षा की तैयारी,
अंतिम में मिलेगी कामयाबी, कर्म में मन लगा।।
निवासी : मुंगेली, (छत्तीसगढ़)
संप्राप्ति : शिक्षक एल. बी., संस्थापक एवं अध्यक्ष यादव समाज सेवा, कला, संस्कृति एवं साहित्य उन्नयन समिति मुंगेली।
प्रकाशित पुस्तक : युगानुयुग
सम्मान : मुख्यमंत्री शिक्षा गौरव अलंकरण ‘शिक्षादूत’ पुरस्कार से सम्मानित, उत्कृष्ट शिक्षक सम्मान, छत्तीसगढ़ हिन्दी रत्न सम्मान, अटल स्मृति सम्मान, बेस्ट टीचर अवॉर्ड।
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।
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