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हिन्दी है हम – प्रतियोगिता में तृतीय स्थान प्राप्त रचना

कमल किशोर नीमा
उज्जैन (मध्य प्रदेश)
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विश्व हिंदी दिवस १० जनवरी २०२६ पर आयोजित कविता लिखो प्रतियोगिता में तृतीय स्थान प्राप्त रचना

हिन्दी है हम, हिन्दुस्तान ये हमारा।
फिर क्यों न मने हिंदी दिवस प्यारा।
हिन्दी है …

भाषाएँ अनेक, हिंदी सब मे सितारा।
हिंदी सर्वव्यापी जोड़ने की सूत्रधारा
हिन्दी है…

ओम् है सृष्टि , मस्तक पर है बिन्दी।
भाषाएँ रहें अधूरी हो न जहाँ हिंदी।
हिन्दी है…

सोच हो हमारी हिंदी हो राष्ट्र भाषा।
बहुसंख्यक भाषी की पूरी हो आशा।
हिन्दी है…

सशक्त राष्ट्र भाषा जिसकी पहचान।
मिला है देश की संस्कृति को सम्मान।
हिन्दी है …

बहु भाषी देश हमारा सब से न्यारा।
अनेकता मे एकता हिंदी ही सहारा।
हिन्दी है …

परिचय :- कमल किशोर नीमा
पिता : मोतीलाल जी नीमा
जन्म दिनांक :१४ नवम्बर १९४६
शिक्षा : एम.कॉम, एल.एल.बी.
निवासी : उज्जैन (मध्य प्रदेश)
रुचि : आपकी बचपन में व्यायाम शाला में व्यायाम, क्षिप्रा नदी में तैराकी और शिक्षा अध्ययन के साथ कविता, गीत, नाटक लेखन मंचन आदि में गहन रूचि रही है।
व्यवसाय सेवा : आप सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग. सन् १९६४ से सन् १९७० तक एवं सन् १९७१ से सन् २००६ तक के उद्योग जगत के साथ काम करते रहे। सेवा निवृत्ति के बाद ईश्वर की प्रेरणा से पिछले पांच वर्षों से भगवान का भजन आरंभ हुआ है। वर्तमान में लगभग २० भजन लिखे गए हैं, जिनमें १६ भजन यू ट्यूब पर संगीतकार द्वारा संगीतबद्ध करवा कर प्रसारित किए गए हैं जिन्हें यू ट्यूब सनातनम ​​भक्ति २एम स्टूडियो सर्च कर पृथक किया जा सकता है। अयोध्या में श्री राम मंदिर में श्री राम जी की प्राण प्रतिष्ठा के अवसर पर टॉवर चौक पर भजन संध्या के अवसर पर आपके द्वारा लिखित भजनों की प्रस्तुति दी गई।

घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है।


प्रिय मित्र, शुभचिंतक एवं परिवारजन आपको प्रेषित मेरी नई स्वरचित रचना, कृपया लिंक को टच कर रचना पढ़ें एवं कमेंट बॉक्स में अपने विचार रख कविता को लाइक करें …🙏🏻😊💐💐💐 राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपनी रचनाएँ
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