
मीना भट्ट “सिद्धार्थ”
जबलपुर (मध्य प्रदेश)
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धन्य धरा ये भारती, भारत देश महान।
स्वर्गिक सुख की खान है, करे विश्व सम्मान।।
मुकुट हिमालय देश का, सागर छूता पाँव।
पावन गंगा बह रही, है खुशियों की मृदु छाँव।।
माटी चंदन देश की, रत्नों की है खान।
बरसे कंचन मेघ से, हिन्द है कृषि प्रधान।।
मानवता ही धर्म है, समरसता पहचान।
सत्य अहिंसा हिन्द की, सकल विश्व प्रतिमान।।
राम श्याम से बहुगुणा, अवतारित बलवीर
गौरव गाथा गा रहे, मोहक है तस्वीर।।
लक्ष्मी अरु दुर्गावती, शासक हुईं महान।
दीप शिखा बन देश पर, प्राण किये बलिदान।।
गाते गाथा शौर्य की, फौलादी है शान।
करते जय वीरांगना, देश करे अभिमान।
वीर शहीदों की धरा, गौरवमय इतिहास।
बोस तिलक की भूमि का, होता नित्य विकास।।
प्रहरी सीमा पर खड़े, रक्षक हैं वो वीर।
रखवाली करते सदा, होते नहीं अधीर।।
संस्कृति भारत की विविध, भाषा, भिन्न विचार।
बॅंधे एकता सूत्र हैं, करते जग उजियार।।
हिन्दू मुस्लिम सब करें, सदा देश हित काम।
सिक्ख सभी के मित्र हैं, भले अलग हो नाम।।
भारत देश विशाल है, व्यापक बहुत विधान।
अनुशासन का ताज भी, करे विश्व गुणगान।।
परिचय :- मीना भट्ट “सिद्धार्थ”
निवासी : जबलपुर (मध्य प्रदेश)
पति : पुरुषोत्तम भट्ट
माता : स्व. सुमित्रा पाठक
पिता : स्व. हरि मोहन पाठक
पुत्र : सौरभ भट्ट
पुत्र वधू : डॉ. प्रीति भट्ट
पौत्री : निहिरा, नैनिका
सम्प्रति : सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश (मध्य प्रदेश), लोकायुक्त संभागीय सतर्कता समिति जबलपुर की भूतपूर्व चेयरपर्सन।
प्रकाशित पुस्तक : पंचतंत्र में नारी, काव्यमेध, आहुति, सवैया संग्रह, पंख पसारे पंछी
सम्मान : विक्रमशिला हिंदी विश्वविद्यालय द्वारा, विद्या सागर और साहित्य संगम संस्थान दिल्ली द्वारा, विद्या वाचस्पति की मानद उपाधि, गुंजन कला सदन द्वारा, महिला रत्न अलंकरण, राष्ट्रीय हिंदी रक्षक मंच इंदौर द्वारा “उत्कृष्ट न्यायसेवा अंतर्राष्ट्रीय सम्मान २०२४” से सम्मानित तथा कई अन्य साहित्यिक संस्थाओं से सम्मानित
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