
सुषमा शुक्ला
आबिदजान (अफ्रीका)
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निस्तब्धता जब बोल न पाए, मन भीतर से टूट जाता है,
शब्दों के अभाव में पीड़ा का शोर और गूंज जाता है।
खामोशी की चादर ओढ़े, दर्द अकेला सोता है,
भीड़ में रहकर भी इंसान खुद से ही रोता है।
निस्तब्ध क्षणों में स्मृतियाँ तीखे तीर चलाती हैं,
अनकहे सवाल बनकर रातों की नींद चुराती हैं।
जहाँ संवाद थम जाए, वहाँ संबंध दम तोड़ते हैं,
निस्तब्धता में ही कई अपने पराए हो जाते हैं।
खामोशी का बोझ कभी-कभी शब्दों से भारी है,
यह भीतर-भीतर जलाती है, पीड़ा इसकी न्यारी है।
निस्तब्धता में मन खुद से ही लड़ जाता है,
हर मौन क्षण एक नया घाव दे जाता है।
बिना आवाज़ की पीड़ा भी गहरी चोट लगाती है,
निस्तब्धता अक्सर आत्मा को चुपचाप रुलाती है।
जब भावों को मार्ग न मिले, वे आँसू बन बहते हैं,
निस्तब्धता में ही कई सपने दम तोड़ते रहते हैं।
खामोश रहने की आदत भी कष्ट बन जाती है,
अनकहे जज़्बातों की आग भीतर सुलग जाती है।
निस्तब्धता सुकून नहीं, जब मन अशांत हो जाए,
यह सबसे बड़ा कष्ट बनकर जीवन को थकाए।
परिचय :- सुषमा शुक्ला
जन्म : 25 अप्रैल
निवास : आबिदजान (अफ्रीका)
मूल निवासी : इंदौर (मध्य प्रदेश)
शिक्षा : एमए राजनीति शास्त्र बरकतुल्लाह भोपाल विश्वविद्यालय
लेखन विधा : कविता, हायकु, पिरामिड, लघु कथा
लेखन : लेखन के क्षेत्र में कोविद में जीवनसाथी की प्रेरणा से लेखन का कार्य शुरू किया। धर्म और संस्कृति इन मंचों पर काव्य गोश्तियां संचालन किया मनपसंद हास्य कला साहित्य मंच पर कम से कम १२५ बार संचालन किया,, और चार बार अध्यक्ष पद प्राप्त किया। इन सभी संस्थाओं से अब तक कुल मिलाकर १२५ सम्मान पत्र प्राप्त हुए।
विशेष : नाइजीरिया में, लागोस शहर में हिंदी भाषा का प्रचार प्रसार किया। अफ्रीका के आबिदजान शहर में हिंदी विश्व दिवस पर हिंदी के बावत भूषण और एक छोटी सी कविता पढ़ने का भारतीय दूतावास इंडियन एंबेसी में शुभ अवसर प्राप्त हुआ। तात्कालीन भारतीय राजदूत डॉक्टर राजेश रंजन के हाथों ससम्मान १०,००० सीफा राशि आबिदजान की मुद्रा, जिसे स्थानीय भाषा में सीफा कहा जाता है प्रदान की गई।
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