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नउकरी के बंधना

राजेन्द्र लाहिरी
पामगढ़ (छत्तीसगढ़)
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(छत्तीसगढ़ी बोली)

घुम-घुम, किन्दर-किन्दर
अपन रचना ल सुनावव जी,
कभु रइपुर, कभु कोरबा
अउ कभु रइगढ़ म
अंजोर बगरावव जी,
बंधाय हे हमर अंग-अंग बंधना म,
रचना पढ़े के फुरसत नइ हे
अपन दुवारी अउ घर अंगना म,
राती-राती भर गोष्ठी करव
दिन म ऊंघे के बेरा हावय,
गेरवा ले गर बंधाय हे हमर
आउ चारो कोती घेरा हावय,
तुंहर घुमइ फिरइ देख के
लालच हमरो बाढ़त हावय,
दंउरी कस बइला फंदाय हवन
छाती म पथरा माढ़त हावय,
दु पइसा कमाए के चक्कर म
हाल डोल नइ पावत हावन,
फाग, ददरिया चाहे
भजन दय मालिक ह
नाच-नाच के सब गावत हावन,
पुरुस्कार ल तुंहर देख के संगी
हिरदे हमर गदगद झुमत हावय,
तुमन ल रचना सुनावत देखके
मन हमरो छत्तीसगढ़ भर घुमत हावय।

परिचय :-  राजेन्द्र लाहिरी
निवासी : पामगढ़ (छत्तीसगढ़)
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।

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